खार्ग द्वीप पर हमला करके क्या अमेरिका दुनिया को कर देगा बर्बाद?

US strikes on Kharg Island : ईरान युद्ध अब निर्णायक मोड़ पर जाता दिख रहा है. ईरान के खार्ग द्वीप पर मंगलवार 7 अप्रैल को अमेरिका की ओर कई हमले किए गए. यह हमला कुवैत और सऊदी अरब के यूएस बेस से किया गया है. खार्ग द्वीप पर हमला ईरान के ऑयल लाइफलाइन पर हमला है, जिसका असर सिर्फ ईरान पर नहीं बल्कि पूरे विश्व पर दिखेगा. आइए समझते हैं खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले से क्या होगा नुकसान.

US strikes on Kharg Island : ईरान युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका ने नयी चाल चली है. वह ईरान पर दबाव बना रहा है, ताकि वह सरेंडर कर दे और उसके सामने झुक जाए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी नीति के तहत खार्ग द्वीप के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया है, ताकि ईरान पर दबाव बने और उतना नुकसान भी ना हो.

खार्ग द्वीप से होता है ईरान का लगभग 90% ऑयल एक्सपोर्ट

खार्ग द्वीप ईरान का सबसे प्रमुख कच्चा तेल निर्यात टर्मिनल है. इसका अर्थ यह है कि ईरान का 90% ऑयल एक्सपोर्ट यहीं से होकर जाता है. इसी वजह से ईरान के तेल क्षेत्र में खार्ग द्वीप का बहुत महत्व है. खार्ग द्वीप के महत्व को समझते हुए युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल ने इसपर हमला नहीं किया, लेकिन अब जबकि युद्ध 40वें दिन में प्रवेश कर रहा है, युद्ध को खत्म करने के लिए निर्णायक फैसले के तहत खार्ग द्वीप पर हमला किया गया है.

खार्ग द्वीप पर हमला विश्व को आर्थिक संकट की ओर लेकर जाएगा

खार्ग द्वीप के जरिए ईरान अपने देश के 90% कच्चे तेल को पूरी दुनिया के बाजारों तक पहुंचाता है. खार्ग द्वीप पर हमला होने से बड़े-बड़े तेल टैंक, पाइपलाइन नेटवर्क और लोडिंग सुविधाओं पर असर होगा. इसका सीधा प्रभाव यह होगा कि विश्व में तेल आपूर्ति पर असर होगा.कच्चे तेल की सप्लाई बंद होने से घोर संकट उत्पन्न होगा और तेल की कीमतें अप्रत्याशित तरीके से बढ़ेंगी. ईरान की अर्थव्यवस्था भी पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी और जो देश ईरान से तेल खरीदते हैं उनपर व्यापक प्रभाव होगा. रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबकि अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर हमला तो शुरू कर दिया है, लेकिन वह तेल के इंफ्रास्टक्चर पर हमला करने से बच रहा है. इसकी वजह यह है कि उसे पता है कि अगर खार्ग तबाह होता है, तो उसका असर अमेरिका पर भी दिखेगा.

पूरे विश्व पर गहरा जाएगा ऊर्जा संकट

अमेरिका ने अगर खार्ग द्वीप के इंफ्रास्टक्चर पर हमला किया, तो विश्व के बाजारों तक कच्चे तेल को पहुंचाना कठिन हो जाएगा. उसपर होर्मुज स्ट्रेट भी पहले से ही बाधित है. यह स्थिति विश्व को भयंकर ऊर्जा संकट की ओर लेकर जाएगा, क्योंकि जवाबी कार्रवाई में ईरान भी अमेरिका के तेल ठिकानों पर हमला कर सकता है. इसका प्रभाव यह होगा कि यह युद्ध एक क्षेत्र का युद्ध नहीं रहेगा और इसका फैलाव कई देशों तक हो सकता है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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