गालूडीह. घाटशिला प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय धातकीडीह में ‘खिला पुस्तकालय’ की पहल ने बच्चों में पढ़ने की नयी संस्कृति विकसित की है. जो बच्चे पहले केवल खेलकूद में समय बिताते थे, वे अब लाइब्रेरी की किताबों में भी रुचि ले रहे हैं. स्कूल के शैक्षणिक वातावरण में आये बदलाव की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है.
कमजोर बच्चों के लिए चित्रों का सहारा :
पढ़ने में कमजोर बच्चों को जोड़ने के लिए शिक्षकों ने चित्र आधारित किताबों का चयन किया. बच्चे चित्रों के माध्यम से कहानी समझने लगे. धीरे-धीरे बड़े विद्यार्थियों की मदद से अक्षर ज्ञान और पढ़ने की कला सीखने लगे. स्कूल में ‘फ्री रीडिंग टाइम’ की व्यवस्था है, जिसमें बच्चे अपनी पसंद की कोई भी किताब चुनकर पढ़ सकते हैं.
बाल संसद और शिक्षकों का मिला मार्गदर्शन:
शिक्षक निखिल रंजन के मार्गदर्शन में अब बच्चों ने लाइब्रेरी से पुस्तकें इश्यू कराना शुरू कर दिया है. इसमें बाल संसद और वरिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों की भूमिका अहम रही है, जो छोटे बच्चों को कहानियां पढ़कर सुनाते हैं. इस सामूहिक प्रयास से बच्चों की भाषा, शब्दावली और विषयों की समझ में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.
पीरियड पुस्तकालय से जागरूक हो रहीं बच्चियां:
पुस्तकालय परिसर में ‘पीरियड पुस्तकालय’ का संचालन किया जा रहा है. इसका उद्देश्य माहवारी और जेंडर (लिंग) के प्रति सही समझ विकसित करना है. इससे किशोरियों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है.
ऐसे हुई पहल की शुरुआत
प्रधानाध्यापक साजिद अहमद, सीनी संस्था की एबलिन होरो, बाल संसद और विद्यालय प्रबंधन समिति ने अभियान की रूपरेखा तैयार की. शिक्षकों ने किताबें उपलब्ध करायीं. बच्चों को रोचक कहानियां सुनाकर उनमें जिज्ञासा पैदा की. कहानी के पात्रों और उनसे मिलने वाली सीख पर चर्चा ने बच्चों को किताबों के करीब ला दिया.