आर्थिक तंगी में कई मजदूर कर गये पलायन, रोटी पर भी आफत
मुसाबनी : श्रीराम इपीसी को बंद सुरदा खदान व मुसाबनी प्लांट संचालन का कार्यादेश मिले करीब एक माह हो गये. अबतक खदान व प्लांट चालू नहीं हो पाया है. इससे मजदूरों की परेशानी बढ़ गयी है. जानकारी हो कि आइआरएल ने अचानक तीन जून से सुरदा खदान व मुसाबनी प्लांट बंद कर दिया. इससे करीब […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
मुसाबनी : श्रीराम इपीसी को बंद सुरदा खदान व मुसाबनी प्लांट संचालन का कार्यादेश मिले करीब एक माह हो गये. अबतक खदान व प्लांट चालू नहीं हो पाया है. इससे मजदूरों की परेशानी बढ़ गयी है. जानकारी हो कि आइआरएल ने अचानक तीन जून से सुरदा खदान व मुसाबनी प्लांट बंद कर दिया. इससे करीब डेढ़ हजार मजदूर बेरोजगार हो गये. बेरोजगारी का दंश झेल रहे मजदूर आर्थिक परेशानी में हैं. प्रबंधन व ठेका कंपनी बंद खदान व प्लांट जल्द चालू करने की बात कई बार कह चुकी है.
अबतक खदान व प्लांट नहीं खुला है. रोजगार से वंचित मजदूर खदान व प्लांट खुलने के इंतजार में हैं. कई मजदूर आर्थिक परेशानी के कारण बाहर मजदूरी के लिए पलायन कर गये हैं. जो मजदूर यहां हैं उनके समक्ष परिवार के लिए भोजन का जुगाड़ करना चुनौती है. दुकानदार उधार देने में आना कानी कर रहे हैं. खदान बंदी का असर स्थानीय बाजार पर पड़ा है. खदान बंदी के कारण मजदूरों का वेतन भुगतान नहीं होने से इस वर्ष राखी को लेकर बाजार में रौनक नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रों में गोमा पर्व मनाया जाता है, लेकिन आर्थिक तंगी पर्व के उत्साह पर भारी पड़ रहा है.
महिला मजदूरों ने कहा- बच्चों का पेट भरना भी हुआ मुश्किल
अपनी मांगों के समर्थन में महिला मजदूर भी दिनभर धरने पर बैठी रही. महिला मजदूरों ने कहा काम कराकर आइआरएल भाग गयी. मई की मजदूरी अबतक बकाया है. तीन जून से डेढ़ हजार मजदूर बेरोजगार हैं. डेढ़ माह से मजदूर लगातार आंदोलन कर रहे हैं. एचसीएल-आइसीसी प्रबंधन सिर्फ आश्वासन ही दे रहा है. कोई नेता, मंत्री कुछ बोल नहीं रहा. मजदूर क्या करें, कहां जाय. उनके बच्चे क्या खायेंगे. किसी को कोई फ्रिक नहीं. आंदोलन के सिवाय कोई दूसरा रास्ता हम लोगों के समक्ष नहीं बचा है.
कार्यादेश मिलने के एक माह बाद भी नहीं शुरू हुई सुरदा खदान