US-Iran War : ईरान के लोगों के लिए आज की रात कयामत की रात साबित हो सकती है. हालांकि ईरान भी किसी भी सूरत में अमेरिका के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं है और वो जवाबी कार्रवाई की बात कर चुका है. अगर दोनों देश इसी तरह आमने सामने रहे, तो भारतीय समयानुसार सुबह 5:30 बजे के बाद विश्व में कुछ विनाशकारी हो सकता है. इसकी तीव्रता कितनी होगी, यह तो अमेरिका के राष्ट्रपति ही तय कर सकते हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका कूटनीति की ओर जाता है या फिर किसी बड़े युद्ध की ओर.
क्या ट्रंप की चेतावनी परमाणु हथियारों के प्रयोग की ओर इशारा कर रही हैं?
इसमें कोई दो राय नहीं है कि ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी है, लेकिन इस चेतावनी को मनोवैज्ञानिक दबाव के रूप में ज्यादा देखा जा रहा है. परमाणु हथियारों का प्रयोग बहुत बड़ा कदम होगा, जिसके लिए शायद अमेरिका तैयार ना हो. वैसे भी व्हाइट हाउस ने यह स्पष्ट किया है कि जेडी वेंस के टूल्स का मतलब परमाणु हथियार नहीं बल्कि कई और तरीके हैं. ट्रंप अपने सोशल मीडिया पोस्ट में एक ओर जहां चेतावनी दे रहे हैं, वहीं बातचीत के अवसर को भी जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं.
परमाणु हथियारों का प्रयोग हुआ, तो पूरी दुनिया अमेरिका के खिलाफ होगी
अमेरिका इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि अगर उसने परमाणु हथियारों का प्रयोग किया, तो उसे पूरी दुनिया का विरोध झेलना होगा. इसी वजह से अमेरिका परमाणु हथियार होते हुए भी उनका प्रयोग करने में हिचकेगा. रूस और चीन जैसे देश भी उसके खिलाफ खड़े हो सकते हैं, जो युद्ध को क्षेत्रीय तनाव से बढ़ाकर वैश्विक कर देंगे.ईरान पर परमाणु हमला हुआ, तो लाखों लोगों की मौत हो सकती है और पूरा मिडिल ईस्ट रेडिएशन के दायरे में आ जाएगा, जिससे मानवता पर घोर संकट उत्पन्न हो जाएगा. निश्चित तौर पर अमेरिका इस स्थिति के लिए तैयार नहीं होगा, क्योंकि ट्रंप की इस नीति का विरोध उनके अपने देश में भी होगा.
एनर्जी वार की तरफ जा रहा है विश्व
ईरान ने ट्रंप की धमकी के बाद कहा है कि इंशाल्लाह कल जो होगा, उसमें अमेरिका और उसके सहयोगियों को ईरान की प्राचीन सभ्यता की ताकत दिखेगी. कहने का आशय यह है कि ईरान भी पूरी तैयारी में है और वे अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ एनर्जी वार करने के लिए तैयार हैं. ईरान होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलेगा और खार्ग द्वीप पर जो अमेरिकी हमले हो रहे हैं, उनके एवज में अमेरिका और उसके दोस्तों को तेल संकट झेलने पर मजबूर करेगा. यह तमाम बयान यह साबित करते हैं कि मिडिल ईस्ट में अगले 12 घंटे बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं, जो पूरी दुनिया को एक नई दिशा दे सकते हैं.
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