संवाददाता, दुमका. दिशोम मांझी थान परिसर में विशेष साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नाजीर हेंब्रम के नेतृत्व में संताली भाषा एवं ओलचिकी लिपि में प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘फुरगल आड़ांग’ के जुलाई-सितंबर अंक का भव्य विमोचन किया गया. पत्रिका के नए अंक को समाज को समर्पित किया गया.
नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगी पत्रिका
समारोह में वक्ताओं ने ‘फुरगल आड़ांग’ के प्रकाशन को संताली भाषा, साहित्य और ओलचिकी लिपि के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह के साहित्यिक प्रयास न केवल भाषा को जीवंत बनाए रखने में मदद करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध भाषाई, साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी काम करते हैं.
वक्ताओं ने कहा कि संताली भाषा और ओलचिकी लिपि की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए साहित्यिक गतिविधियों को लगातार प्रोत्साहित करने की जरूरत है. ‘फुरगल आड़ांग’ इस दिशा में महत्वपूर्ण मंच के रूप में अपनी भूमिका निभा रही है.
नाजीर हेंब्रम के संपादन में हुआ प्रकाशन
पत्रिका के संपादक के रूप में नाजीर हेंब्रम ने दायित्व निभाया है, जबकि सहायक संपादक के रूप में सुशील हांसदा ‘चिलबिंदा’ ने योगदान दिया है. सलाहकार मंडल में चुंडा सोरेन ‘सिपाही’, शिवलाल मरांडी ‘बेचारा’, शिबू टुडू ‘हिसालिया’ और मसीह मरांडी शामिल हैं. वहीं, पत्रिका के संरक्षक के रूप में बाबुजी सोरेन ‘बिरबाहा’ का योगदान रहा.
साहित्यप्रेमियों और समाज के प्रबुद्धजनों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में दिशोम मांझी थान समिति के मांझी बाबा बीनीलाल टुडू, टेकलाल मरांडी, सीताराम सोरेन, रामप्रसाद हांसदा, मोहन टुडू, प्रेम हांसदा, शिवशंकर सोरेन, सुनील मरांडी, सुभाष किस्कू, शिवकांत मुर्मू, झुमरी सोरेन समेत बड़ी संख्या में समाज के प्रबुद्धजन, साहित्यकार और साहित्यप्रेमी मौजूद रहे. कार्यक्रम के दौरान संताली भाषा, साहित्य और संस्कृति को आगे बढ़ाने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया.
