ब्रिक्स मंच पर चमकेगा दुमका का जीआई टैग प्राप्त डोकरा शिल्प, कोच्चि में होगा प्रदर्शन

Dumka News: दुमका का GI टैग प्राप्त डोकरा शिल्प अब BRICS मंच पर अपनी पहचान बनाएगा. कोच्चि में आयोजित कार्यक्रम में इस पारंपरिक शिल्प का प्रदर्शन किया जाएगा. पूरी खबर नीचे पढ़ें…

आनंद जायसवाल
Dumka News: दुमका की पारंपरिक डोकरा शिल्पकला अब वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाने की ओर बढ़ चली है. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी यानी जेएसएलपीएस की पहल से जिले के जीआई टैग प्राप्त डोकरा शिल्प उत्पादों का चयन ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय बैठक में प्रदर्शन और बिक्री के लिए किया गया है. शनिवार को इन उत्पादों की खेप दुमका से रांची के लिए रवाना कर दी गयी. रांची में राज्य के अन्य चयनित उत्पादों के साथ इन्हें समेकित कर केरल के कोच्चि भेजा जायेगा, जहां आठ और नौ जुलाई को आयोजित ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान देश-विदेश से आने वाले प्रतिनिधियों के बीच इनका प्रदर्शन और विपणन किया जायेगा.

झारखंड के हस्तशिल्प को मिला विशेष स्थान

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन में झारखंड के पारंपरिक हस्तशिल्प को विशेष स्थान मिला है. जेएसएलपीएस की ओर से राज्य के चुनिंदा उत्पादों की प्रदर्शनी लगायी जायेगी, जिसमें दुमका का जीआई टैग प्राप्त डोकरा शिल्प प्रमुख आकर्षण होगा. यह अवसर झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आदिवासी कला और पारंपरिक शिल्प कौशल को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के साथ-साथ महिला शिल्पकारों के हुनर को नई पहचान दिलाने वाला माना जा रहा है.

पारंपरिक आभूषणों और वस्तुओं की होगी प्रदर्शनी

प्रदर्शनी के लिए तैयार किये गये उत्पादों में आदिवासी जीवन को दर्शाती प्रतिमाएं, पारंपरिक आभूषण, पशु-पक्षियों की कलात्मक आकृतियां, दीप-स्तंभ, फूलदान, गृह-सज्जा की आकर्षक सामग्री तथा अन्य हस्तशिल्प वस्तुएं शामिल हैं. इन सभी उत्पादों का निर्माण पारंपरिक लॉस्ट वैक्स तकनीक से किया गया है. यह सदियों पुरानी शिल्प परंपरा झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है और अपनी बारीक नक्काशी व कलात्मक सौंदर्य के कारण देश-दुनिया में अलग पहचान रखती है.

डोकरा शिल्पकला से तैयार की गई कलाकृतियां

मां लखी आजीविका सखी मंडल ने तैयार की वस्तुएं

दुमका जिले के जगुडीह स्थित मां लखी आजीविका सखी मंडल से जुड़ी महिला शिल्पकारों ने इन उत्पादों को तैयार किया है. जेएसएलपीएस के सहयोग और मार्गदर्शन में इन महिलाओं ने पीढ़ियों से चली आ रही डोकरा कला को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप नया स्वरूप दिया है. जीआई टैग मिलने के बाद इस शिल्प की पहचान और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग भी बढ़ी है.

डोकरा शिल्प को मिलेगी वैश्विक पहचान

जेएसएलपीएस का मानना है कि ब्रिक्स जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर भागीदारी से महिला शिल्पकारों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और नए खरीदार मिलेंगे. साथ ही झारखंड के डोकरा शिल्प को निर्यात और वैश्विक बाजार तक पहुंच का नया रास्ता भी खुलेगा. यह पहल केवल हस्तशिल्प के प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और पारंपरिक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

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By Amleshnandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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