दुमका: सरकारी दफ्तरों की कार्यशैली और प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने समाहरणालय में ही अवस्थित जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालयीन कार्यों और विभागीय अभिलेखों की गहन समीक्षा की.
डीसी ने रैंडम आधार पर विभिन्न संचिकाएं निकलवाकर उनकी अद्यतन स्थिति जांची और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी फाइल अनावश्यक रूप से पेंडिंग न रहे. सभी मामलों का निष्पादन समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित किया जाए.
अभिलेखों की जांच, लापरवाही पर सख्त कदम
निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने कर्मियों की सेवा पुस्तिका, आगत-निर्गत पंजी, लॉग बुक और गार्ड फाइल सहित कई महत्वपूर्ण अभिलेखों को खुद खंगाला. इस समीक्षा के दौरान कुछ कर्मियों के कार्यों में लापरवाही पाई गई, जिस पर कड़ा रुख अपनाते हुए डीसी ने संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगने और उनका वेतन अगले आदेश तक स्थगित करने के निर्देश दिए.
पेंशन में देरी पड़ेगी भारी, क्लर्क पर होगी कार्रवाई
उपायुक्त ने सेवानिवृत्त शिक्षकों के पेंशन मामलों को प्राथमिकता पर रखने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि शिक्षकों के पेंशन स्वीकृति और भुगतान में किसी भी प्रकार की बेवजह देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यदि किसी स्तर पर ढिलाई के कारण पेंशन लटकती है, तो सीधे संबंधित लिपिक (क्लर्क) के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.
निरीक्षण के दौरान डीसी ने विभाग के तहत संचालित कल्याणकारी योजनाओं और विद्यालयों में मिलने वाले मिड-डे मील की व्यवस्था की भी जानकारी ली. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की सभी महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ जिले के हर पात्र छात्र-छात्रा तक समय पर पहुंचाना शिक्षा विभाग की पहली जिम्मेदारी है. इसमें किसी भी तरह की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
