धनबाद के झरिया में BCCL की हैवी ब्लास्टिंग से दरके मकान, घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग, DGMS के नियमों की उड़ीं धज्जियां

धनबाद के राजापुर कोलियरी में BCCL की जोरदार हैवी ब्लास्टिंग से लोगों की जिंदगी तबाह हो गई. कई पक्के मकानों में बड़ी दरारें आ गईं, जिससे दर्जनों परिवार रातों-रात बेघर हो गए. सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं.

धनबाद: बीसीसीएल (BCCL) एरिया-9 के राजापुर कोलियरी अंतर्गत भगतडीह-कामिनी कल्याण बस्ती में मंगलवार को की गई जोरदार हैवी ब्लास्टिंग के कारण भारी तबाही देखने को मिली है. ब्लास्ट के दौरान हुए तेज कंपन से कई पक्के मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं. धमाके के बाद उपजी दहशत के कारण कई परिवारों को रात में ही अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी. प्रभावित ग्रामीणों के अनुसार, ये सभी मकान उनकी रैयती जमीन पर बने हुए हैं. पीड़ित परिवारों में संजय सिंह, विजय रवानी, रमेश रवानी, भोला रवानी, आशीष रवानी, गोविंद सिंह, विजय सिंह, बलराम रवानी, निरंजन रवानी और मानिकचंद रवानी समेत दर्जनों परिवार शामिल हैं.

हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी

इस हादसे के बाद महानिदेशालय खान सुरक्षा (DGMS) के सुरक्षा नियमों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. नियमानुसार, ब्लास्टिंग स्थल से 100 मीटर के दायरे में कोई भी स्थायी आबादी या संरचना नहीं होनी चाहिए. गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति दीपक रोशन) ने 7 मई 2024 को 'अंबे माइनिंग प्रा. लि. बनाम बीसीसीएल' मामले में इसी 100 मीटर की शर्त को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया था. उस मामले में 75-80 मीटर की दूरी पर मकान होने के कारण DGMS ने ब्लास्टिंग की अनुमति को अमान्य कर दिया था. ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि राजापुर में बिना दूरी का सत्यापन किए और वाइब्रेशन मॉनिटरिंग के बिना ही मनमाने तरीके से ब्लास्टिंग की जा रही है.

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हैवी ब्लास्टिंग से बढ़ा बड़ा खतरा

राजापुर-भगतडीह और आरएसपी कॉलेज (RSP College) क्षेत्र लंबे समय से भूमिगत आग (Underground Fire) और भू-धंसाव (Subsidence) के लिए अति-संवेदनशील चिन्हित हैं. वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के निर्देश पर तत्कालीन उपायुक्त अंजनेयलु दोड्डे ने सुरक्षा कारणों से आरएसपी कॉलेज को स्थानांतरित (Shift) करने की प्रक्रिया शुरू की थी. ऐसे संवेदनशील इलाके में हैवी ब्लास्टिंग किए जाने से एक बड़ी आपदा का खतरा मंडराने लगा है.

ग्रामीणों ने उठाई जांच और पुनर्वास की मांग

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आउटसोर्सिंग कंपनी सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी कर रही है और बीसीसीएल प्रबंधन मूकदर्शक बना हुआ है. रात के समय घरों में काला धुआं और कोयले की धूल (Coal Dust) भरने से लोगों को सांस लेने में भारी परेशानी हो रही है. घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची. आक्रोशित ग्रामीणों ने मांग की है कि DGMS और बीसीसीएल की संयुक्त तकनीकी टीम तुरंत स्थल का निरीक्षण करे. साथ ही ब्लास्ट डिजाइन, विस्फोटक की मात्रा, वाइब्रेशन रिकॉर्ड और 100 मीटर की दूरी से जुड़े सुरक्षा रिकॉर्ड की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और प्रभावित रैयतों के सुरक्षित पुनर्वास पर जल्द ठोस निर्णय लिया जाए.

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By Umesh singh

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