बलियापुर के बीबीएम के प्रो एपी भंडारी को मिला सम्मान, बॉलीवुड के निर्देशक सलीम दुर्रानी ने दिया पुरस्कार

Dhanbad News: बीबीएम कॉलेज बलियापुर के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो डॉ अमरेश प्रसाद भंडारी को साहित्यिक योगदान के लिए नई दिल्ली में साहित्य सेवा सम्मान मिला. बॉलीवुड के लेखक-निर्देशक सलीम दुर्रानी और अभिनेता शाहबाज खान ने उन्हें सम्मानित किया. कॉलेज परिवार और विद्यार्थियों ने खुशी जताते हुए बधाई दी.

बलियापुर से कलीम की रिपोर्ट

Dhanbad News: धनबाद के बलियापुर स्थित बीबीएम कॉलेज में अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो डॉ अमरेश प्रसाद (एपी) भंडारी को उनके उल्लेखनीय साहित्यिक योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है. नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में उन्हें साहित्य सेवा काउंसिल की ओर से साहित्य सेवा सम्मान प्रदान किया गया. इस उपलब्धि से कॉलेज के शिक्षकों, छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों और अभिभावकों में खुशी का माहौल है. प्रो भंडारी को यह सम्मान साहित्य, लेखन और समाज के प्रति उनके निरंतर योगदान को देखते हुए दिया गया. उन्हें बॉलीवुड के निर्देशक सलीम दुर्रानी ने यह पुरस्कार प्रदान किया. कॉलेज परिवार ने इसे संस्थान के लिए गौरव का विषय बताया है.

नई दिल्ली में आयोजित समारोह में मिला सम्मान

जानकारी के अनुसार, दो दिन पूर्व नई दिल्ली के मोजाइक सैंडोज बैंक्वेट हॉल में आयोजित सम्मान समारोह में देशभर के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया. इसी समारोह में प्रो डॉ एपी भंडारी को भारत सरकार द्वारा अनुमोदित साहित्य सेवा सम्मान से नवाजा गया. समारोह में बड़ी संख्या में साहित्य और कला जगत से जुड़े लोग उपस्थित रहे.

सलीम दुर्रानी और शाहबाज खान ने किया सम्मानित

समारोह के मुख्य अतिथि बॉलीवुड के चर्चित लेखक एवं फिल्म निर्देशक सलीम दुर्रानी थे. उनके साथ प्रख्यात अभिनेता शाहबाज खान भी मंच पर मौजूद रहे. दोनों ने संयुक्त रूप से प्रो. डॉ. एपी भंडारी को सम्मान पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया. कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में प्रो. भंडारी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिक्षाविद समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

धनबाद के सालूकचापड़ा गांव के रहने वाले हैं प्रो भंडारी

प्रो डॉ अमरेश प्रसाद भंडारी मूल रूप से धनबाद जिले के कलियासोल प्रखंड अंतर्गत सालूकचापड़ा गांव के निवासी हैं. ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है. बीबीएम कॉलेज में अंग्रेजी विभागाध्यक्ष के रूप में वे लंबे समय से अध्यापन कार्य कर रहे हैं. विद्यार्थियों के बीच उनकी पहचान एक कुशल शिक्षक, साहित्यकार और प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में है.

इसी साल लेखन कार्य के लिए भी हो चुके हैं सम्मानित

यह पहला अवसर नहीं है जब प्रो. भंडारी को उनके कार्यों के लिए सम्मान मिला हो. इससे पहले इसी वर्ष मई महीने में धनबाद के रेलवे ऑडिटोरियम में आयोजित एक कार्यक्रम में पत्रकार संघ (भारत) ने उन्हें उत्कृष्ट सामाजिक कार्य और लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया था. लगातार मिल रहे सम्मानों ने यह साबित किया है कि साहित्य, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनका समर्पण व्यापक स्तर पर सराहा जा रहा है.

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कॉलेज परिवार ने दी बधाई

नई दिल्ली में सम्मानित होने की खबर मिलते ही बीबीएम कॉलेज परिसर में खुशी का माहौल बन गया. कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जितेंद्र महतो ने प्रो. भंडारी को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि पूरे संस्थान के लिए गर्व का विषय है. कॉलेज के अन्य प्राध्यापकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. सभी ने उम्मीद जताई कि प्रो भंडारी आगे भी अपने साहित्यिक और शैक्षणिक कार्यों से समाज और शिक्षा जगत को नई दिशा देने का कार्य करते रहेंगे.

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Published by: Kumarvishwat sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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