देवघर : सड़क हादसों की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. कठोर कानून होने के बाद भी एक्सीडेंट केस में जान गंवाने वालों का सिलसिला थम नहीं रहा है, जो चिंता का विषय है. उपरोक्त बातें प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा के चेयरमेन कौशल किशोर झा ने न्याय सदन में डालसा की ओर से आयोजित कार्यशाला में कही. उन्होंने कहा कि एमवी एक्ट की सामान्य जानकारी रखें. इस एक्ट के अनुसार मोटर एक्सीडेंट केस में अगर किसी की मौत हो जाती है तो उनके आश्रितों को मुआवजा मिलेगा, लेकिन आपराधिक मंशा से वाहन चलाकर जान से मारने की घटना में आश्रितों को मुआवजा नहीं मिलेगा. इस प्रकार के मामले हत्या की श्रेणी में आते हैं और ठोस गवाह देने पर सजा हो सकती है.
अनुसंधान में तकनीकी मानकों पर जोर
उन्होंने मोटर यान अधिनियम की बारीकियों को विस्तार से बताया. साथ ही अनुसंधान के समय पुलिस पदाधिकारियों को विभिन्न प्रकार के तकनीकी मानकों को ध्यान में रखने की बात पर बल दिया. पीडीजे ने कहा कि आश्रितों को अगर समय पर मुआवजा राशि मिल जाती है तो बहुत बड़ी राहत होती है. कार्यशाला में एडीजे प्रथम राजीव रंजन ने कहा कि पीड़ितों को त्वरित मुआवजा की राशि दिलाने के लिए बीमा कंपनी को मानवता के दृष्टिकोण से कार्य करने की जरूरत है. त्रुटियों के चलते दावाकर्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है.
लंबित क्लेम में समय पर आरोप पत्र का निर्देश
फैमिली कोर्ट के एडिशनल जज भानु प्रताप सिंह ने एमवी एक्ट के संशोधित अधिनियमों की विस्तार से जानकारी दी. एसपी प्रवीण पुष्कर ने कहा कि एमवी एक्ट के नये अधिनियम के तहत मोटर एक्सीडेंट के मामलों में आश्रितों को समय पर मुआवजा दिलाने के लिए पुलिस पदाधिकारी हर संभव प्रयास करते हैं. कहा कि क्लेम के सभी लंबित मुकदमों में आइओ समय पर आरोप पत्र दाखिल करें, जिससे पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सके. मौके पर एमवीआइ अमित कुमार झा, जिला अधिवक्ता संघ के महासचिव कृष्णधन खवाड़े, बीमा कंपनी अधिवक्ता निलांजन गांगुली समेत अन्य ने विचार रखे. कार्यशाला में डालसा सचिव संदीप निशित बारा ने सक्रियता दिखायी. इसमें पुलिस पदाधिकारियों के अलावा डालसा से जुड़े मीडियेटर, अधिवक्ता, डालसा के संजय कुमार सिन्हा आदि मौजूद थे.
