देवघर से अजय यादव की रिपोर्ट
Deoghar News: महुआ झारखंड के जंगलों में आग भड़का रहा है. महुआ चुनने में आसानी के लिए ग्रामीण पेड़ के नीचे आग लगा दे रहे हैं और फिर वह आग पूरे जंगल में फैलकर वनस्पतियों को नष्ट कर दे रही है. सूबे के देवघर जिले के डिगरिया पहाड़ की चोटी पर स्थित जंगलों में लगी आग ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है. बाबूडीह ग्राम की ओर स्थित इस पहाड़ी क्षेत्र में बीते दो दिनों से आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. सोमवार को दिन में वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था, लेकिन शाम होते-होते आग ने फिर से विकराल रूप धारण कर लिया.
शाम ढलते ही बढ़ी आग की रफ्तार
स्थानीय लोगों के मुताबिक, दिन के समय आग आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन जैसे ही शाम होते ही तेज हवा और सूखी झाड़ियों के कारण आग तेजी से फैलने लगी. देखते ही देखते जंगल का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत वन विभाग को सूचना दी गई. इसके बाद टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया.
महुआ चुनने के लिए लगाई जाती है आग
ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में बार-बार आग लगने के पीछे एक बड़ी वजह महुआ है. कुछ लोग महुआ चुनने में आसानी के लिए सूखी पत्तियों और झाड़ियों में आग लगा देते हैं. इससे जमीन साफ हो जाती है और महुआ आसानी से दिखाई देने लगता है. हालांकि, यह तरीका बेहद खतरनाक साबित हो रहा है, क्योंकि एक छोटी सी चिंगारी पूरे जंगल को अपनी चपेट में ले लेती है.
चार घंटे की मशक्कत के बाद मिला नियंत्रण
वन विभाग की टीम और पशु रक्षकों ने मिलकर करीब चार घंटे तक लगातार प्रयास किया. आग बुझाने के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ स्थानीय संसाधनों का भी उपयोग किया गया. कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन आखिरकार देर रात तक आग पर काबू पा लिया गया.
पर्यावरण और वन्यजीवों पर खतरा
वन विभाग के अनुसार, इस तरह की आग से जंगल को भारी नुकसान होता है. छोटे-छोटे पौधे, औषधीय जड़ी-बूटियां और दुर्लभ वनस्पतियां जलकर नष्ट हो जाती हैं. इसके अलावा, कई जंगली जानवर और पक्षी भी आग की चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते हैं. इस तरह की घटनाएं पर्यावरण संतुलन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं.
जागरूकता अभियान चला रहा विभाग
वन विभाग लगातार ग्रामीणों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है. इसके तहत नुक्कड़ नाटक, ग्राम सभाएं और हाट-बाजारों में ढोल पिटवाकर लोगों को जंगल में आग न लगाने का संदेश दिया जा रहा है. विभाग का मानना है कि जब तक स्थानीय लोग सहयोग नहीं करेंगे, तब तक इस समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण पाना मुश्किल है.
अधिकारियों की अपील
इस मामले में वन विभाग के सब बिट ऑफिसर राजीव रंजन ने बताया कि वनकर्मियों और पशु रक्षकों की टीम ने कड़ी मेहनत से आग पर काबू पाया. उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि महुआ चुनने के लिए जंगल में आग न लगाएं. इसके बजाय महुआ नेट, पुरानी धोती या साड़ी का उपयोग करें, ताकि जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रह सकें.
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सतर्कता ही समाधान
डिगरिया पहाड़ की यह घटना एक बार फिर यह बताती है कि थोड़ी सी लापरवाही कितनी बड़ी आपदा का रूप ले सकती है. जरूरत है कि सभी लोग मिलकर जंगलों की सुरक्षा करें और पर्यावरण संरक्षण में अपनी जिम्मेदारी निभाएं. तभी इन प्राकृतिक संसाधनों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा.
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