महंगाई: बढ़ती कीमतों से मध्यम व मजदूर वर्ग के लोगों पर आफत, थाली से कमने लगी खाद्य सामग्री
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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देवघर : महंगाई धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है. सब्जी और अनाज की कीमतों में लगातार तेजी ने मध्यम वर्गीय और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की हालत खराब कर दी है. रोज कमाने खानेवालों की स्थिति और खराब है. उनकी थाली से चीजें धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं. दाल तो पहले ही पकड़ से दूर थी, […]
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देवघर : महंगाई धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है. सब्जी और अनाज की कीमतों में लगातार तेजी ने मध्यम वर्गीय और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की हालत खराब कर दी है. रोज कमाने खानेवालों की स्थिति और खराब है. उनकी थाली से चीजें धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं. दाल तो पहले ही पकड़ से दूर थी, अब हरी सब्जी की जगह चना व आलू ने ले लिया है. रोज सुबह क्या बने और जीवन की गाड़ी कैसे चले इस पर चिंता में ही घर की महिला का आधा समय गुजर जा रहा.
मध्यम वर्गीय परिवार बच्चों की पढ़ाई और घर खर्च में इस कदर उलझा है कि अगर कहीं कोई बीमार पड़ गया या फिर कोई और काम आ पड़ा तो बजट गड़बड़ा जाना तय है. एक आकलन के मुताबिक एक मजदूर या रोज कमाने-खानेवाले का परिवार दो समय के भोजन पर 200 से 250 रुपये खर्च कर रहा. बता दें कि मनरेगा मजदूर हो या कुशल मजदूर उसकी न्यूनतम मजदूरी 270 रुपये है. यदि भोजन पर ही 250 रुपये तक खर्च हो जाये, तो अन्य बातों के लिए कुछ बचता ही नहीं.
सही पोषण के लिए जरूरी है कम से कम 2000 कैलोरी
सही पोषण के लिए एक महिला को प्रतिदिन 2000 कैलारी व पुरुष को 2500 कैलोरी की जरूरत होती है. ये कैलोरी दाल-भात, रोटी, हरी सब्जियां, दूध, मांस आदि से मिलता है. अगर इतना कैलोरी नहीं मिली, तो खास कर महिलाएं कुपोषण की शिकार हो जाती हैं. एक थाली में दाल-भात, दो रोटी, दो हरी सब्जियां व पापड़ होना चाहिए. दूसरी एक सामान्य परिवार की बात करें तो कम से कम एक गरीब परिवार में पति-पत्नी व दो बच्चों सहित कुल चार सदस्य होते हैं, जिनका भोजन परिवार के मुखिया की कमाई पर निर्भर करता है. उन्हें दिनभर की मेहनत के बाद 250-300 रुपये मिलते है. जबकि एक परिवार को दो बेला के भोजन बनाने में 200-250 रुपये खर्च होता है. खुदा-न-खास्ता मुखिया एक दिन बीमार पड़ गया या मौसम की मार की वजह से रोजगार नहीं मिला, तो अगले दिन परिवार के भोजन पर आफत हो जायेगा. पौष्टिक भोजन के अभाव में सामान्य लोगों की सेहत बिगड़ती जा रही है.
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