कुंदा(चतरा). कुंदा, चतरा जिले में महादेव मठ मंदिर है. यह पर्यावरण की देखभाल का एक अच्छा उदाहरण बन रहा है. यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां प्रकृति और पर्यावरण के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई जा रही है.
मंदिर व आसपास के इलाकों में पेड़-पौधे काटना वर्जित है. पेड़-पौधे काटने पर आर्थिक जुर्माने के साथ-साथ दंड का भी प्रावधान है. मंदिर परिसर में सैकड़ों पेड़-पौधे लगाए गए हैं, जो यहां की सुंदरता, शांति और हरियाली को नई ऊंचाई देते हैं.
धार्मिक पेड़ों से बढ़ रही हरियाली
मंदिर के चारों ओर लगे सैकड़ों पेड़-पौधे जैसे पीपल, आम, बेल, रुद्राक्ष, अशोक और आंवला न सिर्फ धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि पर्यावरण को शुद्ध और हरा-भरा बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. इन पेड़ों की हरियाली देखने लायक होती है.
मंदिर परिसर में कई ऐसे पेड़ भी लगे हैं, जो दिन और रात ऑक्सीजन देते हैं. असल में, पीपल जैसे पेड़ अपने खास श्वसन तंत्र के कारण चौबीसों घंटे ऑक्सीजन छोड़ते रहते हैं, जबकि दूसरे पेड़ रात में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हुए भी दिन में पर्याप्त ऑक्सीजन देते हैं. इससे मंदिर का माहौल साफ और ताजा बना रहता है.
सावन में शिवलिंग पर चढ़ते हैं हजारों बेलपत्र
सावन में शिवलिंग पर हजारों बेलपत्र चढ़ाना भक्तों की आस्था का प्रतीक है, और इसी आस्था के साथ मंदिर परिसर में पेड़ों का संरक्षण भी किया जाता है. सावन के महीने में हजारों बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाये जाते हैं, जो भक्तों की आस्था का प्रतीक है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मन्नतें भी पूरी होती हैं. कहा जाता है कि एक बार यहां आकर सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
जैसे, कोई श्रद्धालु अपनी नौकरी की मन्नत लेकर आया और कुछ समय बाद उसे अच्छी नौकरी मिल गई, तो वह वापस आकर आभार व्यक्त करता है. ऐसे कई किस्से यहां सुनने को मिलते हैं, जो लोगों के विश्वास को और मजबूत करते हैं.
कदम के पेड़ मंदिर परिसर को ठंडी छाया देते हैं, जहां श्रद्धालु पूजा के बाद बैठकर आराम कर सकते हैं. वहीं पेलपत्र व चंदन के पेड़ माहौल को सुगंधित और शांत बनाते हैं. इन पेड़ों की मौजूदगी से मंदिर क्षेत्र आध्यात्मिक और प्राकृतिक ऊर्जा से भर जाता है.
पेड़ों की कटाई पर रोक, संरक्षण का दिया जा रहा संदेश
मंदिर परिसर में किसी भी पेड़ को काटना मना है. इससे यह जगह हरियाली और शांति का केंद्र बनी हुई है. मंदिर न सिर्फ आस्था का स्थल है, बल्कि पर्यावरण जागरूकता फैलाने का भी एक उदाहरण है.
यहां की प्राकृतिक छटा लोगों को प्रकृति से जोड़ने और उसे संरक्षित करने की प्रेरणा देती है. आने वाली पीढ़ियां भी इस हरे-भरे वातावरण को देखकर खुश होंगी और पर्यावरण के महत्व को समझेंगी.
धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक धरोहर बचाने का संदेश
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यह मंदिर सभी के लिए प्रेरणा है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ हमें अपनी प्राकृतिक धरोहर की रक्षा भी करनी चाहिए. महादेव मठ मंदिर यह संदेश देता है कि प्रकृति का संरक्षण हमारा धर्म है.
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