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इटखोरी पहुंचे जैन मुनि विशुद्ध सागर जी महाराज, बोले- विनाश का कारण है छल-कपट की संपत्ति, इससे रहें दूर

तीन दिवसीय प्रवास पर चतरा के इटखोरी पहुंचे जैन मुनि विशुद्ध सागर जी महाराज. उन्होंने लोगों से अस्तित्व बचाए रखने की बात कही. साथ ही कहा कि छल-कपट की संपत्ति विनाश का कारण बनती है. वहीं, स्वभाव और आचरण मनुष्य को आकर्षित करता है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand news: चतरा के भदलपुर प्रवास के दौरान प्रवचन देते जैन मुनि विशुद्ध सागर जी महाराज.
Jharkhand news: चतरा के भदलपुर प्रवास के दौरान प्रवचन देते जैन मुनि विशुद्ध सागर जी महाराज.
प्रभात खबर.

Jharkhand news: जैन मुनि अध्यात्म योगी आचार्यशीरोमणि 108 विशुद्ध सागर जी महाराज का चतरा के मां भद्रकाली मंदिर परिसर स्थित भगवान शीतलनाथ के जन्म कल्याणक भूमि, भदलपुर में 3 दिवसीय प्रवास हुआ. इनके साथ 27 जैन मुनि, साध्वी तथा 100 शिष्य साथ में है. इटखोरी की सीमा क्षेत्र में मंगलाप्रवेश करते ही जैन धर्मावलंबियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया. उनका आगमन 18 मार्च, 2022 को हुआ था. उनके स्वागत के लिए झारखंड के अलावा मध्यप्रदेश, राजस्थान, बंगाल और बिहार के जैन धर्मावलंबी आये थे. तीन दिवसीय इटखोरी प्रवास के बाद जैन मुनि चतरा के लिए प्रस्थान किये.

लोग अपना अस्तित्व बचाए रखें

जैन मुनि ने अपने प्रवचन में कहा कि जो मनुष्य अपना अस्तित्व खो देता है वह भाई के साथ नहीं रह सकता है. उन्होंने कहा कि लक्ष्मण ने अपना अस्तित्व बचाये रखा इसलिए राम के साथ रह सके. लोगों को सताकर और रुलाकर जो संपत्ति अर्जित की जाती है, उसका भोग नहीं कर सकते. वह संपत्ति बचता नहीं है, लेकिन जो भाग्य से अर्जित की जाती है, उसका भोग सुख-समृद्धि से कर सकते हैं. विवेक से अर्जित की गई संपत्ति उसकी आयु लंबी होती है. छल-कपट की संपत्ति विनाश का कारण बनती है.

लोगों के भाव पर निर्भर करता है संस्कृति का उत्थान व पतन

उन्होंने कहा कि स्वभाव और आचरण मनुष्य को आकर्षित करता है. किसी भी जगह का तीर्थ भूमि होना महत्वपूर्ण नहीं होता है. उस भूमि पर बैठकर तप करना महत्वपूर्ण है. संस्कृति के उत्थान एवं पतन मनुष्य के भावों पर निर्भर करता है. कहा कि पुण्य करोगे, तो सुख समृद्धि होगी और पाप करोगे, तो दुखी रहोगे.

दयालु व्यक्ति ही धर्मात्मा होता है

जैन मुनि ने कहा कि वस्त्रों से किसी व्यक्ति के दीनहीन की पहचान नहीं होती है, बल्कि कर्म और स्वभाव से महानता की पहचान होती है. कहा कि ऋषि मुनियों के मुख से निकला वाणी गंगोत्री के तरह होता है. दयालु व्यक्ति ही धर्मात्मा होता है. विचारों को स्वच्छ रखने के लिए भोजन स्वच्छ करना होगा.

मिनी मधुवन की दिखी झलक

भदलपुर में इसबार मिनी मधुवन का झलक दिखाई दिया. जैन समाज के सैकड़ों लोग तीन दिन तक होली का त्योहार मनाये. मालूम हो कि जैन समाज के लोग होली का त्योहार मधुवन (पारसनाथ) में मनाते हैं. इस मौके पर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सुरेश झांझरी, नरेंद्र जैन, सुनील जैन, ताराचंद जैन, निर्मल जैन, विनोद जैन, जितेंद्र जैन, विजय जैन, इंदौर के नवीन जैन, राजकुमार जैन, रविसेन जैन समेत कई क्षेत्रों से आये जैन समाज के महिला-पुरुष थे.

रिपोर्ट : विजय शर्मा, इटखोरी, चतरा.

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