चतरा. सदर प्रखंड के डाढ़ा गांव के चरकी टोंगरी में बुधवार को आदिवासी सरना समाज द्वारा प्रकृति की पूजा के साथ झंडा बदली कार्यक्रम किया गया. पाहन व पहनाइन ने चाला आयो (धरती मां) की पूजा कर कार्यक्रम की शुरुआत की. इसके बाद वीर बुधु भगत की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया. इस दौरान बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया. मौके पर कृष्णा पाहन ने कहा कि इस धरती पर जब से मानव का विकास हुआ है, तब जब से सरना धर्म चला आ रहा है. इस धरती पर सबसे पहले मानव के रूप में आदिवासी समुदाय की ही उत्पत्ति हुई. उस समय से आदिवासी प्रकृति को अपना आराध्य मानते चले आ रहे हैं. प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना व्यर्थ है. जन संघर्ष मोर्चा के जिला सचिव महेश बांडो ने कहा कि सरना स्थल चरकी टोंगरी सरकार के विकास योजना (भारतमाला परियोजना) का भेंट चढ़ने वाला है. हमलोगों किसी भी कीमत में इसे बचाना है. यह हमारी आस्था व अस्तित्व से जुड़ा है. सभा को महेश लकड़ा, सरजू उरांव, सोमर उरांव, बहादुर उरांव, रामदेव उरांव, पोको पहनाइन, मंजू पहनाइन व इंजीनियर विनोद तिर्की ने संबोधित किया. कार्यक्रम को सफल बनाने में चरकी टोंगरी के अध्यक्ष रघु कच्छप, विवेक कच्छप, सतीश कच्छप, मुकेश कुजूर, झिरगा उरांव समेत अन्य ने अहम भूमिका निभायी.
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