Chatra News: झारखंड के चतरा जिले में टंडवा थाना क्षेत्र के बड़गांव में इमरोज की मॉब लिंचिंग के मामले को लेकर झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने गुरुवार को नया परिसदन भवन में प्रेसवार्ता कर कई गंभीर बातें कहीं. उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया घटना बेहद गंभीर है और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
घटना को राजनीति से प्रेरित बताया
प्रेसवार्ता के दौरान हिदायतुल्लाह खान ने दावा किया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होता है. उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मुखिया एवं वर्तमान मुखिया प्रतिनिधि विजय चौबे ने आगामी जिला परिषद चुनाव को ध्यान में रखते हुए भीड़ को उकसाया और घटना को अंजाम दिलाने में उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना को एक अलग स्वरूप देकर लोगों को भड़काने का प्रयास किया गया. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है.
माता-पिता के साथ मारपीट का आरोप
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि इमरोज के माता-पिता के साथ भी कथित रूप से अमानवीय व्यवहार किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों को रस्सी से बांधकर बेरहमी से पीटा गया, जिसमें इमरोज के पिता गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि घायल पिता को तत्काल बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग के किसी सक्षम अस्पताल में भर्ती कराया जाए, ताकि उन्हें समुचित चिकित्सा सुविधा मिल सके.
पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
हिदायतुल्लाह खान ने घटना के दौरान पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि कथित रूप से पुलिस की मौजूदगी में युवक की पिटाई हुई. यदि ऐसा हुआ है, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है. उन्होंने कहा कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस पदाधिकारियों और जवानों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए. उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया कि दोषी पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए.
कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर कोई आरोप है, तो उसके लिए कानून और न्यायालय की व्यवस्था मौजूद है. किसी भी नागरिक को भीड़ बनाकर किसी व्यक्ति के साथ हिंसा करने या सजा देने का अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि किसी पर संदेह था, तो उसे पकड़कर पुलिस के हवाले किया जाना चाहिए था. कानून के शासन वाले लोकतांत्रिक समाज में भीड़ द्वारा न्याय (मॉब जस्टिस) स्वीकार्य नहीं हो सकता.
सरकार को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
हिदायतुल्लाह खान ने बताया कि आयोग पूरे मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को अपनी विधिक टीम (लीगल टीम) के समक्ष प्रस्तुत करेगा. इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी जाएगी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस प्रकार की घटनाओं में शामिल किसी भी व्यक्ति को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा. सरकार दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेगी.
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पीड़ित परिवार को सहायता देने का निर्देश
आयोग अध्यक्ष ने जिला प्रशासन को पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता और सुरक्षा भी मिलनी चाहिए. प्रेसवार्ता के दौरान राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष प्राणेश सोनोमन और सदस्य कारी बरकत अली भी मौजूद थे. आयोग ने कहा कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. वहीं, घटना की परिस्थितियों और आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
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