बोकारो जिले में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर “सुरक्षित कुआं – सुरक्षित वन्यजीव” अभियान की शुरुआत की गई है. उपायुक्त अजय नाथ झा ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से इस पहल की जानकारी साझा करते हुए लोगों से अभियान में सहयोग करने की अपील की है.
डीसी ने बताया कि खुले कुएं वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं. उन्होंने 24 जनवरी 2025 की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि गोमिया के गोपो गांव में एक किशोर हाथी रात के अंधेरे में खुले कुएं में गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी. घटना के बाद हाथियों का झुंड भी मौके पर पहुंचा और काफी देर तक वहां रुका रहा था.
खुले कुओं से वन्यजीवों को खतरा
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का असर वन्यजीवों के व्यवहार पर भी पड़ता है और कई बार इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है. बोकारो, रामगढ़ और हजारीबाग समेत कई जिलों में इसके प्रभाव देखने को मिले हैं.
हाल ही में कसमार प्रखंड के हरनाड गांव में भी एक हिरण खुले कुएं में गिरकर मारा गया था. डीसी ने कहा कि लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि खुले कुओं को सुरक्षित करना बेहद जरूरी है. उपायुक्त ने कहा कि जंगली जानवर जानबूझकर गांवों में नहीं आते, बल्कि डर या भटकाव के कारण आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं. रात के अंधेरे में खुले कुएं दिखाई नहीं देने के कारण वे हादसे का शिकार हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि कुओं के चारों ओर छोटी मुंडेर बनाने, घेराबंदी करने या ढक्कन लगाने जैसे छोटे प्रयासों से इन घटनाओं को रोका जा सकता है.
डीसी ने जानकारी दी कि दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की पुण्यतिथि के अवसर पर इस अभियान की शुरुआत की जा रही है. इसके तहत गोमिया और पेटरवार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बिना मुंडेर वाले कुओं का सर्वे कराया जाएगा और उन्हें सुरक्षित बनाने की दिशा में काम किया जाएगा.
डीसी अजय नाथ झा ने लोगों से की सहयोग की अपील
अजय नाथ झा ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यह अभियान केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि संवेदना और सह-अस्तित्व का संदेश भी देता है. उन्होंने लोगों से संकल्प लेने की अपील की कि कोई भी कुआं बिना सुरक्षा के नहीं छोड़ा जाए, ताकि भविष्य में किसी बेजुबान जानवर की जान ऐसी दुर्घटनाओं में न जाए.
