झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ की बोकारो जिला इकाई का धरना डीसी कार्यालय के बाहर 82वें दिन सोमवार को जारी रहा. प्रतिनिधिमंडल ने डीसी को ज्ञापन भी सौंपा. डीसी कार्यालय की ओर से मनरेगा कर्मियों को छह जून तक सेवा में योगदान करने का निर्देश दिया गया है. इस पर संघ की ओर से कहा गया कि आदेश की अवहेलना करना उनका उद्देश्य नहीं है. लेकिन मनरेगा कर्मियों के आंदोलन विकल्प नहीं, बल्कि विवशता बन गया है.
समाधान का मार्ग निकालने की अपील
ज्ञापन में कहा गया कि मनरेगा कर्मियों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासनिक दबाव के माध्यम से आंदोलन समाप्त कराया जाता है, तो कर्मियों व आम लोगों का लोकतांत्रिक आंदोलनों और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर विश्वास कमजोर होगा. दबाव बनाने के बजाय सार्थक वार्ता कर समाधान का मार्ग निकाला जाये. मनरेगा कर्मी ग्रेड पे आधारित मानदेय, स्थायी समायोजन, सामाजिक सुरक्षा, आश्रितों को मुआवजा व अनुकंपा के आधार पर रोजगार देने की मांग कर रहे हैं. वर्ष 2024 के आंदोलन के बाद विभाग द्वारा किये लिखित समझौते का भी क्रियान्वयन नहीं किया गया. राज्य के कई जिलों में मनरेगा कर्मियों का कई-कई महीनों का मानदेय बकाया है. प्रतिनिधिमंडल में जिला अध्यक्ष सुनील चंद्र दास, अशोक कुमार दास, कालीचरण रजवार, भवतोष महतो, अशोक कुमार, आनंद लाल महथा, सनथ महथा, सौरांग सहिस, किशोर रजवार, नारायण बाउरी, प्रेमचंद रजवार, सहदेव महथा, सुबोध महतो, कृष्ण बिहारी, गुलाम रब्बानी, तपन कुम्हार आदि शामिल थे.
