दृढ़ संकल्प, प्रकृति प्रेम और मेहनत के बल पर चास प्रखंड के गिरधाटांड़ (ओझाडीह) निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक दशरथ मोदी ग्रामीणों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गये हैं. बचपन से ही पेड़-पौधों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति विशेष लगाव रखने वाले श्री मोदी ने सेवानिवृत्ति के बाद अपनी तीन एकड़ जमीन में हरियाली का संसार रच दिया. अपने घर से लगभग 700 मीटर दूर अपनी जमीन पर झाड़ियों और जंगल को साफ कर मिश्रित बागवानी की. यहां विभिन्न प्रजातियों के आम, केला, नींबू, अमरूद, कटहल, बेर, चीकू, लीची, काजू और अन्य फलदार वृक्ष लगाये हैं. सरकार की मनरेगा योजना तहत उन्हें आम बागवानी और एक कुएं की सुविधा मिली. श्री मोदी ने रांची, कोलकाता समेत कई स्थानों से दुर्लभ और उन्नत किस्मों के पौधे लाकर लगाये. सिंचाई के डीप बोरिंग करायी. सुरक्षा के लिए चहारदीवारी बनवायी और सीसीटीवी कैमरे लगवाये.
सागवान के 400 पौधे लगाये, बत्तख पालन भी
साथ ही लगभग 400 सागवान के पौधे भी लगाये. उनके घर के आसपास लगाये गये 350 से अधिक सागवान के पेड़ आज विशाल हो चुके हैं. श्री मोदी ने कहा कि बागवानी में अपनी ओर से 10 लाख रुपये खर्च किये हैं. इस कार्य में समाजसेवी हरिपद गोप और रघुनाथ टुडू का सहयोग मिला है. बागवानी के साथ-साथ खाकी कैंपबेल नस्ल की बत्तखों का पालन भी शुरू किया है. यह नस्ल 20 सप्ताह की उम्र से अंडे देना शुरू कर देती है और एक साल में लगभग 200 से 250 अंडे देती है.
इसके अलावा उनकी पत्नी सरिता देवी को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तीन एकड़ 50 डिसमिल भूमि पर आठ तालाबों के निर्माण की स्वीकृति मिली है. मत्स्य विभाग द्वारा संचालित यह परियोजना अंतिम चरण में है और जल्द ही यहां मत्स्य पालन का काम शुरू किया जायेगा.श्री मोदी के कार्यों को देखने और सीखने के लिए क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में रोज पहुंच रहे हैं.