चास प्रखंड के कुरा गांव में मां मनसा पूजा को लेकर सारी तैयारी पूरी कर ली गई है. अधिवास के साथ सोमवार को मां मनसा का पूजा प्रारंभ हो गया है. क्षेत्र में सबसे बड़ा मां मनसा की प्रतिमा एवं मंदिर कुरा गांव में स्थित है. ग्रामीणों और कैवर्त परिवार के अनुसार मां मनसा की पूजा पिछले करीब 200 वर्षों से आस्था, परंपरा और धार्मिक विश्वास के साथ होती आ रही है.
मान्यता है कि लगभग दो शताब्दी पूर्व कैवर्त परिवार के पूर्वजों ने गांव में मां मनसा की स्थापना कर पूजा-अर्चना की शुरुआत की थी. तब से यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी निरंतर चली आ रही है. कैवर्त समाज के लोगों का मानना है कि मां मनसा जंगल और जल की देवी हैं. कैवर्त परिवार का पारंपरिक व्यवसाय जल और जंगल से जुड़ा रहा है.
इसी कारण उनके पूर्वजों ने मां मनसा को अपनी आराध्य देवी के रूप में स्थापित किया था. समाज के लोगों का विश्वास है कि मां मनसा की आराधना करने से परिवार और गांव पर देवी की कृपा बनी रहती है और सर्पदंश सहित विभिन्न संकटों से रक्षा होती है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रारंभ में मां मनसा की पूजा सीमित रूप में की जाती थी, लेकिन समय के साथ इसमें ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ती गई. वर्तमान में कैवर्त समाज के साथ आसपास के ग्रामीण भी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना में शामिल होते हैं.
पूजा के दौरान गांव में भक्तिमय वातावरण बना रहता है. श्रद्धालु मां मनसा से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं. मंदिर के पुजारी विजय कैवर्त के अलावा रामू कैवर्त, साधु चरण कैवर्त, दिवाकर कैवर्त, विनायक कैवर्त, रखोहरी कैवर्त, मेघु, गणेश, बिनय विधान कैवर्त और धनुर्धारी कैवर्त सहित समस्त कैवर्त समाज के लोग मौजूद थे.
