बोकारो एयरपोर्ट के संचालन में देरी पर जदयू ने उठाये सवाल, अशोक चौधरी बोले- राजनीतिक नजरिये से देखा गया मामला

जदयू नेता अशोक चौधरी ने बोकारो एयरपोर्ट के लंबित संचालन के लिए राजनीति को जिम्मेदार ठहराया. जानिए उन्होंने स्वास्थ्य और विस्थापितों की समस्याओं पर क्या कहा.

बोकारो. बोकारो एयरपोर्ट का संचालन लंबे समय से लंबित रहने पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने सवाल उठाये हैं. जदयू नेता और पूर्व बियाडा चेयरमैन अशोक चौधरी ने कहा कि एयरपोर्ट का संचालन बोकारो के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन वर्षों से यह योजना अंतिम चरण तक नहीं पहुंच सकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि एयरपोर्ट के संचालन के मुद्दे को राजनीतिक नजरिये से देखे जाने के कारण इसमें लगातार देरी हो रही है.

सेक्टर चार स्थित रॉयल दरबार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अशोक चौधरी ने कहा कि बोकारो एयरपोर्ट के विकास के लिए वर्ष 2018-19 के आसपास उड़ान योजना के तहत प्रथम चरण की शुरुआत हुई थी, लेकिन इसे अंतिम चरण तक पहुंचाने में बोकारो असफल रहा. उन्होंने कहा कि पड़ोसी पुरुलिया जिले में छर्रा एयरफील्ड के निर्माण को लेकर काम आगे बढ़ रहा है, जबकि बोकारो अब भी एयरपोर्ट के संचालन का इंतजार कर रहा है.

रनवे नंबर को लेकर दिया उदाहरण

अशोक चौधरी ने कहा कि फिलहाल बोकारो एयरपोर्ट के रनवे पर 13/31 नंबर अंकित है. उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा न हो कि एयरपोर्ट के चालू होने का इंतजार करते-करते रनवे का नंबर ही बदल जाए.

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उन्होंने बताया कि पृथ्वी का चुंबकीय उत्तरी ध्रुव धीरे-धीरे अपनी स्थिति बदलता रहता है. समय के साथ चुंबकीय दिशा में बदलाव होने पर रनवे के आधिकारिक नंबर में भी बदलाव करना पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में पुराने नंबर को मिटाकर नया नंबर अंकित करना पड़ता है.

विस्थापित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा उठाया

जदयू नेता ने बोकारो के विस्थापित क्षेत्रों की समस्याओं को भी उठाया. उन्होंने कहा कि विस्थापित क्षेत्रों को अब तक पंचायत का दर्जा नहीं मिलना दुखद है. जिन स्थानों पर विस्थापितों को जमीन देकर बसाया गया, वहां भी पानी, सड़क, बिजली समेत कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव है.

उन्होंने कहा कि बोकारो स्टील प्रबंधन अपनी मूल व्यावसायिक गतिविधि यानी इस्पात उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने और गैर-कोर गतिविधियों से बाहर निकलने की नीति पर काम कर रहा है. इसी नीति के तहत शिक्षा विभाग और कल्याण विद्यालयों को भी बंद किया गया.

बीजीएच की स्थिति पर भी जतायी चिंता

अशोक चौधरी ने बोकारो जनरल हॉस्पिटल की स्थिति पर भी चिंता जतायी. उन्होंने कहा कि अस्पताल में अच्छे चिकित्सकों की कमी है. बीजीएच को मेडिकल कॉलेज में बदलने की दिशा में चल रहे प्रयास भी आगे नहीं बढ़ सके हैं.

उन्होंने कहा कि बोकारो जैसे महारत्न कंपनी के शहर में स्वास्थ्य सेवाओं की ऐसी स्थिति चिंताजनक है. बीजीएच को बेहतर बनाने के लिए केवल पैचवर्क से काम नहीं चलेगा. इसके लिए बोकारो स्टील प्रबंधन, केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर स्पष्ट और व्यावहारिक योजना तैयार करनी होगी.

असंगठित मजदूरों के पुनर्वास की मांग

जदयू नेता ने बोकारो के असंगठित मजदूरों की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि शहर में चौराहों पर काम करने वाले मजदूर, ऑटो चालक, सब्जी विक्रेता, फुटपाथ दुकानदार, ठेका मजदूर और विभिन्न घरों व फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिक शहर की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.

उन्होंने कहा कि इन लोगों की समस्या का समाधान केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से नहीं हो सकता. वर्षों से इस तरह के प्रयास होते रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला. अब पुनर्वास, व्यवस्थित बसावट और मानवीय समाधान की दिशा में काम करने की जरूरत है.

बायोमेट्रिक सर्वे कर वास्तविक जरूरतमंदों की पहचान की मांग

अशोक चौधरी ने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट की ऐसी जमीन, जहां तत्काल या निकट भविष्य में कोई आधारभूत संरचना अथवा योजना प्रस्तावित नहीं है, उसे चिह्नित किया जाना चाहिए. राज्य सरकार वहां आवास निर्माण और प्रधानमंत्री आवास योजना समेत अन्य योजनाओं के माध्यम से बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर सकती है.

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उन्होंने जिला प्रशासन से बायोमेट्रिक सर्वे कराने और वास्तविक जरूरतमंद निवासियों की पहचान करने की मांग की, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके.

उन्होंने कहा कि बोकारो के ये मजदूर केवल अतिक्रमणकारी नहीं हैं, बल्कि शहर के अनौपचारिक सेवा प्रदाता हैं. इनके बिना टाउनशिप की रोजमर्रा की व्यवस्था प्रभावित होगी. इसलिए लोगों को उजाड़ने के बजाय पुनर्वास और व्यवस्थित बसावट की नीति अपनाना स्थायी समाधान हो सकता है.

मौके पर जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रवीण कुमार, बाल्मीकि सिंह, पानू महतो, जनार्दन चौधरी, कन्हैया जाधव, केपी सिंह, महेंद्र गोप, चंद्रदीप शर्मा, अनुज कुमार, अभय कुमार, गोविंद ठाकुर, कन्हाई महतो, अमावती देवी, मिथिलेश कुमार समेत अन्य नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे.

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By Sunil tiwari

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