बोकारो सदर हॉस्पिटल में खड़ी रही एंबुलेंस, 108 पर कॉल के बाद भी नहीं मिला रिस्पांस, मासूम की हुई मौत
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Dec 2021 8:30 PM
jharkhand news: बोकारो में एंबुलेंस की लापरवाही का मामला सामने आया है. 108 नंबर पर काॅल करने के बाद भी कोई रिस्पांस नहीं मिला है. जबकि सदर हॉस्पिटल में एंबुलेंस खड़ी रही. इस लापरवाही का खामियाजा एक मासूम को भुगतना पड़ा.
Jharkhand news: बोकारो में 108 एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था लचर है. कॉल के बाद भी कोई रिस्पांस नहीं मिलता है. ऐसा ही एक मामला सदर हॉस्पिटल में देखने को मिला. 108 नंबर एंबुलेंस के इंतजार में दो वर्षीय प्राची की सांस रविवार की शाम सवा चार बजे सदर हॉस्पिटल में टूट गयी. पौने दो घंटे (अपराह्न 02.30 बजे से 4.15) तक चिकित्सक डॉ नसीम अपनी टीम के साथ प्राची को ऑक्सीजन देते रहे. साथ ही सक्शन करते रहे. बार-बार 108 नंबर एंबुलेंस को बुलाने को कहते रहे. हर बार 108 नंबर पर कॉल करने के बाद यही जवाब मिला कि एंबुलेंस भेज रहे हैं. इसके बावजूद एंबुलेंस नहीं आयी और आखिरकार प्राची की जान चली गयी. सदर डीएस डॉ संजय कुमार को मोबाइल पर कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने भी कॉल रिसिव नहीं किया. 108 नंबर एंबुलेंस आया भी तो 4.45 बजे शाम को.
प्राची की मौत का जिम्मेवार कौन है? इसका जवाब किसी के पास नहीं है. प्राची की मौत एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण हुई. सदर हॉस्पिटल प्रांगण में दो-दो एंबुलेंस खड़ी थी, लेकिन हॉस्पिटल के एंबुलेंस का प्रयोग करने की अनुमति अस्पताल के चिकित्सकों को नहीं है. सदर डीएस डॉ संजय कुमार का फरमान है कि किसी भी तरह के मरीज को रेफर करने से पहले उनसे पूछा जाये.
रविवार को डीएस डॉ कुमार ने कई बार डॉ नसीम द्वारा कॉल करने के बाद भी ही मोबाइल रिसीव नहीं किया. ऐसी स्थिति में डॉ नसीम ने खुद से रेफर करने का निर्णय कर दोनों गंभीर मरीज (मां-पुत्री) को रेफर कर दिया. 108 नंबर की एंबुलेंस प्राची की मौत के बाद पहुंची. वहीं, सिविल सर्जन डॉ सिंह व एमओ डॉ नसीम के हस्तक्षेप के बाद 108 नंबर एंबुलेंस सदर हॉस्पिटल पहुंची.
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दूसरा मामला तीन दिसंबर का है. जैनामोड़ के खुंटरी के पास सड़क दुर्घटना हुई थी. तीन युवक जख्मी हुए थे. इसमें मौके पर ही एक की मौत हो गयी थी. सूचना मिलने पर गंभीर रूप से जख्मी युवक को थाना प्रभारी विनय कुमार ने हॉस्पिटल भेजा. दूसरी ओर, विनोद महतो, राजेश सिंह सहित स्थानीय लोगों ने लगातार 108 नंबर पर कॉल किया, लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला. स्थिति की नजाकत को देखते हुए थाना प्रभारी श्री कुमार ने एक हजार रुपये देकर निजी एंबुलेंस मंगा कर जख्मी युवकों को हॉस्पिटल भिजवाया. यहां भी 108 नंबर एंबुलेंस दुर्घटना में जख्मी लोगों के लिए मददगार साबित नहीं हुई.
इस संबंध में सदर हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉ नसीम ने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल होकर एक परिवार के तीन सदस्य दोपहर ढाई बजे दिन में आये थे. इसमें एक पुरुष की मौत हो चुकी थी. 29 वर्षीय महिला व दो वर्षीय बच्ची गंभीर थी. गंभीर स्थिति को देखते हुए दोनों को रिम्स रेफर कर दिया गया. 108 नंबर एंबुलेंस सेवा को कॉल भी कर दिया गया. दो वर्षीय बच्ची प्राची को ऑक्सीजन देकर व सक्शन करके बचाने की पूरी कोशिश की गयी. लेकिन, प्राची की जान 4.13 बचे शाम को चली गयी.
वहीं, बोकारो सिविल सर्जन डॉ जितेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि पहले मानवता को बचाने की जरूरत है. यदि 108 नंबर एंबुलेंस के आने में देरी हो रही थी, तो मुझे तुरंत सूचना दी जानी चाहिए थी. तुरंत सदर हॉस्पिटल में खड़े एंबुलेंस का सहारा लेना चाहिए था. गंभीर स्थिति में पड़े मरीज को बचाने के लिए मैं अपना निजी वाहन भेज सकता था. यह पूरी तरह से गंभीर मामला है. घटना की पूरी जांच खुद करूंगा. सदर डीएस से भी इस मामले में पूछताछ की जायेगी] ताकि सच्चाई सामने आ सके.
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दूसरी ओर, 108 एंबुलेंस सेवा के को-ऑर्डिनेटर अभिषेक किशोर ने कहा कि 108 नंबर सेंट्रलाइज नंबर है. जिले में चलने वाले 21 एंबुलेंस (108 नंबर) का हिसाब-किताब रखा जाता है. यदि कोई 108 पर कॉल करता है और नहीं लगता है. ऐसी स्थिति में मैं मदद करता हूं. मेरे पास सिविल सर्जन या किसी चिकित्सक का कॉल आता है, तो मैं एंबुलेंस एरेंज करता हूं. एंबुलेंस नहीं होने की स्थिति में नहीं दे पाऊंगा. बाकी डीसी साहब जिला के मालिक है. वह सब कुछ कर सकते हैं.
रिपोर्ट: रंजीत कुमार, बोकारो.
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