बेरमो : मजदूरों के चंदे से चुनाव लड़ कर जीते थे रामदास सिंह
Updated at : 19 Apr 2019 8:22 AM (IST)
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राकेश वर्मा 1977 के चुनाव में कांग्रेस के डॉ इम्तियाज को 80 हजार मतों के अंतर से किया था पराजित बेरमो : बेरमो कोयलांचल के दिग्गज ट्रेड यूनियन लीडर व समाजवादी नेता स्व रामदास सिंह 1977 में गिरिडीह लोकसभा सीट पर जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे. कहते हैं इस चुनाव में कोयला […]
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राकेश वर्मा
1977 के चुनाव में कांग्रेस के डॉ इम्तियाज को 80 हजार मतों के अंतर से किया था पराजित
बेरमो : बेरमो कोयलांचल के दिग्गज ट्रेड यूनियन लीडर व समाजवादी नेता स्व रामदास सिंह 1977 में गिरिडीह लोकसभा सीट पर जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे. कहते हैं इस चुनाव में कोयला मजदूरों के चंदे से मात्र दो-ढाई लाख रुपये खर्च कर वे पहली बार संसद पहुंचे थे. रामदास सिंह ने 50 के दशक में बेरमो कोलफील्ड में ट्रेड यूनियन एचएमएस से श्रमिक राजनीति शुरू की थी.
विस चुनाव मात्र 300 मतों से हारे : 1972 के विधानसभा चुनाव में जब बेरमो व नावाडीह एक था तो रामदास सिंह ने सोशलिस्ट पार्टी (चुनाव चिह्न बरगद ) की ओर से विस का चुनाव लड़ा तथा इंटक के दिग्गज नेता स्व बिंदेश्वरी दुबे से मात्र 300 मतों से पराजित हो गये थे.
आपातकाल के दौरान वह मीसा में 18 महीने हजारीबाग जेल में रहे. इसी दौरान 1977 में जनता पार्टी की ओर से रामदास सिंह को लोकसभा का प्रत्याशी बना दिया. उस समय के जनसंघ के पुराने नेता डॉ प्रह्लाद वर्णवाल रामदास सिंह को पेरोल पर हजारीबाग जेल से छुड़ा कर लाये थे.
रामदास सिंह के पास उस समय एक पुरानी एंबेसेडर कार थी. इसी कार से वे पूरे क्षेत्र का दौरा करते थे तथा गांवों में पैदल घूमते थे. चुनाव प्रचार के दौरान कहीं झोपड़ीनुमा होटल में चाय-पकौड़ी खाकर ही कोसों पैदल चलते थे.
कोलकटर खिड़की से फेंकते थे अनाज व पैसे : पुराने लोग बताते हैं कि बेरमो में उस वक्त खदानों में काम करने वाले छत्तीसगढ़ व बिलासपुर (मध्य प्रदेश) के कोलकटरों की काफी तादाद होती थी. इन कोलकटरों के बीच रामदास सिंह काफी लोकप्रिय मजदूर नेता के रूप में जाने जाते थे.
कहते हैं चुनाव के दौरान रामदास सिंह के ढोरी जीएम कॉलोनी स्थित आवासीय कार्यालय की खिड़की से कोयला मजदूर चवन्नी, अठन्नी, एक रुपया, दो रुपये, पांच रुपये, दस रुपये, पचास रुपये व एक सौ रुपये फेंक दिया करते थे. देर रात में चुनाव प्रचार से लौटने के बाद मजदूरों के इसी चंदे के पैसे से दिन भर गाड़ी में तेल भरा कर वे चुनाव प्रचार करते थे.
आज की तरह नहीं देना पड़ता था बूथ खर्च : जनसंघ व भाजपा के पुराने नेता डॉ प्रह्लाद वर्णवाल बताते हैं कि पूरे संसदीय क्षेत्र में जगह-जगह रामदास सिंह जमीन पर दरी पर कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करते थे.
बैठक व सभा स्थल ही पर एक-दो लोग एक गमछा को पकड़ कर चंदा इकट्ठा करते थे. तब आज की तरह बूथ खर्च नहीं देना पड़ता था. स्थानीय लोग ही अपने इलाके में चुनाव का सारा खर्च आपस में चंदा कर वहन करते थे. अब तो एक बूथ पर पांच से दस हजार रुपये तक खर्च पड़ता है.
रामदास सिंह का पूरे चुनाव में मात्र दो से ढाई लाख रुपये खर्च होता था. डॉ वर्णवाल बताते हैं कि चुनाव में जगजीवन राम ने पचास हजार रुपये भिजवाया था. इस चुनाव में रामदास सिंह को 164120, डॉ इम्तियाज अहमद को 85843 तथा झामुमो के बिनोद बिहारी महतो को 24360 मत मिले थे. जनता पार्टी के उम्मीदावर रामदास सिंह ने इस चुनाव में सर्वाधिक 28 फीसदी वोट लाया था, जो गिरिडीह संसदीय क्षेत्र में अब तक का रिकार्ड है. स्व रामदास सिंह गिरिडीह से दो बार सांसद तथा बेरमो से एक बार विधायक रहे, जीवन में ईमानदारी व सादगी बनी रही. ढोरी स्थित एचएमएस के आवासीय कार्यालय में रहना तथा श्रमिक समस्याओं को लेकर हमेशा चौकस रहते थे.
दीवारों पर कूची से लिखा जाता था नारा
रामदास सिंह के भाई व भाजपा के वरीय नेता मधुसूदन प्रसाद सिंह कहते हैं कि चुनाव के दौरान उनके अलावा एक अन्य शिवप्रकाश सिंह पूरे संसदीय क्षेत्र में राजदूत मोटरसाइकिल से घूम-घूम कर दीवारों पर कुच्ची से गेरुआ लाल रंग में चुनावी नारे लिखते थे एवं जनता पार्टी का चुनाव चिह्न चक्र हलधर किसान छाप बनाते थे. उस जमाने में पोस्टर व परचा का ऐसा प्रचलन नहीं था.
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