दिल्ली विधानसभा में AAP विधायक मोहिंदर गोयल ने लहराई नोटों की गड्डी,कहा- मेरी जान को खतरा

मोहिंदर गोयल का कहना है कि इस मामले की जानकारी एलजी को भी है, लेकिन उन्होंने शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की.

दिल्ली में आज लगातार तीसरे दिन भी हंगामा जारी रहा. आप विधायक मोहिंदर गोयल ने विधानसभा में नोटो की गड्डी लहराई. उनका यह आरोप है कि उन्हें रिश्वत में यह गड्डी देने की कोशिश की गयी है. उनका कहना है कि अंबेडकर अस्पताल में भर्ती को लेकर उन्हें यह रिश्वत दी गयी है.

विधायक का आरोप शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई

मोहिंदर गोयल का कहना है कि इस मामले की जानकारी एलजी को भी है, लेकिन उन्होंने शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की. मोहिंदर गोयल का कहना है कि उन्हें रिश्वत टोकन मनी के रूप में दी गयी है. उन्होंने इस संबंध में डीसीपी से भी शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, अंतत: उन्होंने मामले को सदन में उठाया है.

मेरी जान को खतरा है

मोहिंदर गोयल ने सदन में कहा कि जिन्होंने मुझे रिश्वत दी है वे बहुत खतरनाक लोग हैं. बावजूद इसके मैंने उन्हें पकड़वाने के लिए उनसे पैसों की मांग की, ताकि मैं उन्हें रंगे हाथों पकड़वा सकूं. इस संबंध में मैंने डीसीपी को भी जानकारी दी ताकि वे त्वरित कार्रवाई करें. लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया. अब मैं चिंतित हूं क्योंकि वे बहुत खतरनाक लोग हैं और मेरी जान को खतरा है.

एलजी पर बरसे केजरीवाल

विधानसभा में कल अरविंद केजरीवाल ने एलजी पर जमकर हमले किये थे और यह आरोप लगाया था कि वे चुनी हुई सरकार की बात नहीं मानते हैं. वे तानाशाही कर रहे हैं जबकि जनतंत्र में चुनी हुई सरकार सर्वोपरि है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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