संभावित बाढ़ और कटाव को लेकर जिला प्रशासन सतर्क, अधिकारियों को मुस्तैद रहने का निर्देश
वीरपुर (सुपौल) से प्रमोद कुमार की रिपोर्ट:
Supaul news: जिले में एक जून से आधिकारिक रूप से बाढ़ अवधि की शुरुआत हो गई है. संभावित बाढ़ और कटाव की चुनौतियों को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है. जिलाधिकारी सावन कुमार के नेतृत्व में सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है तथा संवेदनशील तटबंधों और नदी क्षेत्रों की लगातार निगरानी शुरू कर दी गई है.
जिलाधिकारी ने बाढ़ सुरक्षा कार्यों से जुड़े अभियंताओं और अधिकारियों को अपने-अपने कार्यस्थलों पर मुस्तैद रहने का निर्देश दिया है. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि बाढ़ अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
प्रशासन द्वारा जिले से होकर गुजरने वाली कोसी, तिलयुगा, बिहुल, खाड़ो, जीता धार समेत अन्य प्रमुख नदियों के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है. संभावित संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
कोसी बराज से 25,850 क्यूसेक पानी छोड़ा गया
जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह आठ बजे कोसी बराज से घटते क्रम में 25,850 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. बराज के डाउन स्ट्रीम में भी 25,850 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया.
वहीं पूर्वी और पश्चिमी कोसी मुख्य नहर में पानी का प्रवाह शून्य रहा. दूसरी ओर नेपाल स्थित बराह क्षेत्र से सोमवार सुबह आठ बजे 21,650 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज रिकॉर्ड किया गया.
जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने तथा सभी विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.
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