सुपौल में 8 डिसमिल सरकारी जमीन हुई अतिक्रमण मुक्त, हाईकोर्ट के आदेश पर चला बुलडोजर

Supaul News: वर्षों से बसे परिवारों के आशियाने टूटे, प्रशासन ने कहा- कोर्ट के आदेश का हुआ पालन

त्रिवेणीगंज (सुपौल). से दीपक कुमार की रिपोर्ट

Supaul News: पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार शाम त्रिवेणीगंज नगर परिषद क्षेत्र के बभनगामा वार्ड संख्या 11 में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब आठ डिसमिल सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त करा दिया. भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर पक्के और कच्चे मकानों को हटाया गया. कार्रवाई के दौरान एक ओर प्रशासन न्यायालय के आदेश का पालन करता नजर आया, तो दूसरी ओर वर्षों से बसे परिवारों के उजड़ते आशियानों ने पूरे माहौल को भावुक बना दिया.

हाईकोर्ट की याचिका के बाद शुरू हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार वार्ड संख्या 11 निवासी विनोद कुमार ने सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने प्रशासन को भूमि खाली कराने का निर्देश दिया था. इसी आदेश के अनुपालन में गुरुवार को अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया.

वरीय दंडाधिकारी सह राजस्व अधिकारी राकेश कुमार के नेतृत्व में अभियान संचालित किया गया. मौके पर थानाध्यक्ष राकेश कुमार, दंडाधिकारी राहुल लव, अंचल अमीन अभिषेक कुमार समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा.

आधा दर्जन मकानों पर चला बुलडोजर

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार करीब आधा दर्जन लोगों ने गैरमजरूआ आम भूमि पर लंबे समय से पक्का और कच्चा निर्माण कर रखा था. कार्रवाई की पूर्व सूचना मिलने के कारण अधिकांश परिवारों ने अपने घरों से जरूरी सामान पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया था.

बुलडोजर पहुंचते ही पूरे इलाके में हलचल मच गई. स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर जमा हो गए और कार्रवाई को देखते रहे. प्रशासन ने पूरे अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया.

बुलडोजर की आवाज के बीच दिखा दर्द

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान सबसे मार्मिक दृश्य तब देखने को मिला जब वर्षों से बसे परिवार अपने घरों को टूटते हुए देखते रहे. किसी की आंखों में आंसू थे तो कोई खामोशी से मलबे में बदलते अपने आशियाने को निहारता रहा.

बुलडोजर की गड़गड़ाहट के बीच उजड़ते घरों और मायूस चेहरों ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया. प्रशासनिक कार्रवाई और मानवीय पीड़ा का यह दृश्य देर तक इलाके में चर्चा का विषय बना रहा.

सरकारी जमीन खाली, लेकिन कई सवाल बाकी

कार्रवाई के बाद प्रशासन ने सरकारी भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त घोषित कर दिया. हालांकि स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि वर्षों से वहां रह रहे परिवारों के पुनर्वास और भविष्य को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे. फिलहाल कोर्ट के आदेश के अनुपालन के साथ प्रशासन ने सरकारी जमीन अपने कब्जे में ले ली है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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