ब्रहमाकुमारीज ईश्वरीय विवि के शाखा केंद्र में धर्म व अध्यात्म का दिखा संगम
ब्रहम बाबा को भोग लगाकर प्रसाद का हुआ वितरण
छातापुर.
मुख्यालय स्थित चकबंदी चौक से पश्चिम स्थित ब्रहमाकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शाखा केंद्र पर शनिवार को धर्म एवं अध्यात्म का संगम देखने को मिला. कार्यक्रम में दिल्ली से पहुंचे मोटिवेशनल स्पीकर प्रमोद भाई जी ने मानव जीवन के मूल्यों को बताते उसके सार्थकता की व्याख्या की. मौके पर विश्वविद्यालय की जिला संचालिका शालिनी दीदी, सुनीती दीदी एवं केंद्र की संचालिका किरण बहन के अलावे गणमान्य, प्रबुद्धजन सहित अध्यात्म प्रेमी नर नारी सम्मिलित हुए.
ब्रहम बाबा को भोग लगाकर प्रसाद का हुआ वितरण
कार्यक्रम के दौरान केंद्र पर अलौकिक माहौल था. सभी अहलादित हो रहे थे. जहां एलसीडी से प्रेरणादायक कई वृत्तचित्र दिखाकर सबों को मोटिवेट किया गया. ब्रहम बाबा को भोग लगाकर उपस्थित जनों के बीच प्रसाद का भी वितरण किया गया. मनोज भाई जी ने कहा कि मनुष्य का जीवन रंगमंच के पात्र की तरह होते हैं. जो अपनी भूमिका का चित्रण करते हैं. आत्मा अदृश्य मेहमान है. जो दिखाई नहीं देता है. कहा कि मनुष्य के जीवन में खुशी कम होती है तो गम बढता चला जाता है. जीवन यात्रा के समान है. हम यात्री की तरह ही हैं. ब्रहम बाबा कहते हैं जैसा सोचेंगे वैसा ही बनेंगे. जो दूसरों को देंगे वापसी में भी वही मिलेगा. इसलिए परम पिता सिर्फ सोच को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं. कहा कि सुबह जगते ही दिन की शुरुआत खुशी वाले ख़यालात से करें. सच में कहा गया है कि कर्म ही पूजा है. जो जैसा करेंगे रिटर्निग में वही आयेगा.
आपस में लड़ेगे तो घर हो जाएगा नरक के सामान
शालिनी दीदी ने कहा कि परिवार का घर आश्रम की तरह होना चाहिए. लेकिन हम पूरी जीवन मकान बनाने में लगा देते हैं. घर को स्वर्ग बनाने के लिए सबको मिलकर चलना चाहिए. आपस में लड़ेंगे तो वही घर नरक के सामान हो जायेगा. दीदी ने दिल्ली से आये प्रमोद भाई के परिचय व विशेषता को बताकर उनका अभिनंदन किया. सुनीती दीदी ने कहा कि ब्रहम बाबा सनातन धर्म की स्थापना करने अवतरित हो चुके हैं. इस ईश्वरीय विश्वविद्यालय में निशुल्क जीवन जीने की कला, धार्मिक व अध्यात्मिक ज्ञान दिये जाते हैं. वहीं किरण बहन ने कहा कि आंतरिक सुंदरता गंगा में स्नान करने से नहीं आ सकती. मौके पर सुरेश कुमार यादव, दीप नारायण भगत, ललितेश्वर पांडेय, लक्ष्मी साह, सुशील कर्ण, सुधीर कर्ण, दिनेश चौधरी, मुनेश्वर यादव मोहरील, कंचन पांडेय, सुधीर गायम, मानिकचंद दास, धनिकलाल मलाकार, राममूर्ति मुखिया, सुशीला दीदी, ललिता देवी मुख्य रूप से थे.