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सुरसर नदी का जलस्तर बढ़ा, क्षतिग्रस्त तटबंध की वजह से हजारों एकड़ फसल डूबी

Updated at : 31 Jul 2019 7:44 AM (IST)
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सुरसर नदी का जलस्तर बढ़ा, क्षतिग्रस्त तटबंध की वजह से हजारों एकड़ फसल डूबी

छातापुर : प्रखंड क्षेत्र के मध्य भाग में प्रवाहित सुरसर नदी का तटबंध क्षतिग्रस्त रहने के कारण खुले रूप से बह रही धारा ने हजारों एकड़ में लगी फसल को डुबो दिया है. जिस कारण इलाके के किसानों के बीच हाहाकार मचा हुआ है. इस इलाके में किसानों की जीविका खेती पर ही निर्भर रहती […]

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छातापुर : प्रखंड क्षेत्र के मध्य भाग में प्रवाहित सुरसर नदी का तटबंध क्षतिग्रस्त रहने के कारण खुले रूप से बह रही धारा ने हजारों एकड़ में लगी फसल को डुबो दिया है. जिस कारण इलाके के किसानों के बीच हाहाकार मचा हुआ है. इस इलाके में किसानों की जीविका खेती पर ही निर्भर रहती है और धान इन लोगों का मुख्य फसल है. मंगलवार की सुबह भी नदी में पानी के बहाव में बढ़ोतरी दर्ज की गयी.

प्रखंड के उत्तरी भाग ठूंठी से लेकर दक्षिणी भाग राजेश्वरी पश्चिम सहित 12 पंचायत क्षेत्रों में नदी का पानी फैलता जा रहा है और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. इन 12 पंचायतों के अलावे नदी का बहाव एसएच 91 में बने पुल और पुलिया के नीचे से होकर पश्चिमी भाग के कई पंचायतों में भी लगे फसल को डुबो दिया है. जबकि नदी की जलधारा से प्रभावित पंचायत के कई टोला व गांव टापूनुमा हो गये हैं.
दूसरी ओर गैड़ा व मिरचैया नदी भी पश्चिमी भाग के पंचायतों में तबाही मचा रही है. पीड़ित किसानों के अनुसार सबसे दुखद यह है कि बीते एक माह से नदी का पानी फैलकर खासकर किसानों को कंगाल बनाने पर तुली हुई है. लेकिन प्रखंड प्रशासन के लोग इलाके में प्रभावित फसलों का जायजा लेने तक नहीं पहुंच रहे.
जिस कारण किसानों में मायूसी के साथ आक्रोश का भाव पनप रहा है. किसान महानंद यादव, बेदानंद यादव, सुधीर कुमार यादव, विजेंद्र यादव, ब्रह्मदेव यादव, अशोक साह, अशोक यादव ने बताया कि वर्ष 2008 में आये कुशहा त्रासदी के बाद से उनलोगों के फसलों का नुकसान झेलना पर रहा है. किसानों की हालत दिनोंदिन दयनीय होती जा रही है.
लेकिन प्रशासन क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत कराने में संवेदनहीन बनी हुई है. वहीं प्रभावित फसलों का मुआवजा भी किसानों को नसीब नहीं हो रहा. सकुनदेव यादव, विरेंद्र यादव की मानें तो धान की खेती किसानों के लिए मुख्य फसल है.
सुरसर के पानी से फसल पूरी तरह डूबकर बर्बाद हो गया. वैसे खेतों में पुनः रोपनी के लिए अब बिचड़ा भी शेष नहीं बचा है. फलाफल पीड़ित किसानों के बीच पूरे साल भोजन की समस्या को लेकर चिंता घर कर गयी है. इधर क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत नहीं कराये जाने के कारण नदी की जलधारा ने इलाके के कच्ची पक्की कई सड़कों को क्षतिग्रस्त कर दिया है.
कई गांव टापू में तब्दील हो गये हैं. नदी के फैल रहा पानी छातापुर-चुन्नी पक्की सड़क के किनारे पहुंचकर लोगों में आवागमन बाधित होने का डर पैदा कर रही है. इस सड़क के क्षतिग्रस्त हो जाने से नौ पंचायतों का मुख्यालय से संपर्क भंग हो जायेगा.
मंगलवार को सामान्य रहा कोसी का जलस्राव
सुपौल. दो दिनों से कोसी के जल अधिग्रहण क्षेत्र में कम बारिश होने के कारण नदी का जलस्तर मंगलवार को सामान्य रहा. शाम 04 बजे कोसी बराज से नदी का डिस्चार्ज 01 लाख 26 हजार 507 क्यूसेक दर्ज किया गया. जो थोड़ी वृद्धि का संकेत दे रहा है. वहीं नेपाल स्थित बराह क्षेत्र में कोसी का जलस्राव 94 हजार 100 क्यूसेक मापा गया. जो घटने के क्रम में है.
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कहते हैं एसडीएम
त्रिवेणीगंज एसडीएम विनय कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ से फसल नुकसान होने की जानकारी उन्हें नहीं मिली है और न ही किसानों के द्वारा लिखित शिकायत उनसे की गयी. यदि फसल का नुकसान हुआ है तो वे अंचलाधिकारी को प्रभावित इलाकों का जायजा लेकर प्रतिवेदन भेजने का निर्देश दे रहे हैं.
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