निजी स्कूलों को एनसीइआरटी की किताबें पढ़ानी होगी

सभी निजी विद्यालयों में नये सत्र का आरंभ हो चुका है, बच्चे अगली कक्षा में प्रवेश कर चुके हैं, महंगी दामों पर किताबें खरीद चुके है. इसके बाद शिक्षा विभाग ने सभी निजी विद्यालयों को एससीइआरटी व एनसीइआरटी की ही किताबें चलाने का फरमान जारी किया है.

प्रतिनिधि, सीवान. सभी निजी विद्यालयों में नये सत्र का आरंभ हो चुका है, बच्चे अगली कक्षा में प्रवेश कर चुके हैं, महंगी दामों पर किताबें खरीद चुके है. इसके बाद शिक्षा विभाग ने सभी निजी विद्यालयों को एससीइआरटी व एनसीइआरटी की ही किताबें चलाने का फरमान जारी किया है. निजी विद्यालयों द्वारा अपने मन मुताबिक प्रकाशकों की किताबें चलाने से अभिभावकों को खासी परेशानी का सामना हर साल करना पड़ता है. प्रत्येक साल किताब के नाम पर उनका आर्थिक शोषण भी होता है. इसी मामले को लेकर स्थानीय डीइओ कार्यालय में एक अभिभावक ने शिकायत किया था. जिसमें उन्होंने अगस्त 2024 में सीबीएसइ द्वारा जारी दिशा निर्देश का हवाला देते हुए एससीइआरटी व एनसीइआरटी की किताबें चलाने की मांग की थी. साथ ही निजी प्रकाशकों द्वारा किताबों के मनमाने मूल्य निर्धारण पर रोक लगाने की मांग की थी.सूत्र बताते हैं कि इधर जब विभाग ने अभिभावक के आवेदन को संज्ञान में लेते हुए मामले को खंगाला तो पाया कि पिछले वर्ष 12 अगस्त 2024 को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने सभी निजी विद्यालयों को कक्षा एक से 12 वीं तक एससीइआरटी व एनसीइआरटी की किताबें चालने का निर्देश दिया था. जिसके बाद जिला पदाधिकारी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सचिव द्वारा जारी सर्कुलर नं0 12/2024 दिनांक 12.08.2024 का हवाला देते हुए सभी निजी विद्यालय के निदेशक, व्यवस्थापक व प्राचार्य को एससीइआरटी व एनसीइआरटी की ही किताबें चलाने का फरमान जारी किया है. अपने इस फरमान को अमली जामा पहनाने के लिए डीपीओ एसएसए सहित सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को दिशा निर्देश दिया है. एक हजार से अधिक निजी विद्यालय है जिला में जिले में तकरीबन ग्यारह सौ से अधिक निजी विद्यालयों का संचालन होता है. जिसमें प्रस्वीकृत्ति प्राप्त विद्यालयों की संख्या 517 है. जिसमें नामांकित बच्चों की संख्या 1.5 लाख से अधिक है. जानकारों का कहना है कि वर्ग एक से 12 वीं की किताबों पर औसतन दो हजार से 6 हजार रूपये का खर्च आता है. वर्ग आठवीं का किताब पांच हजार रूपये का पड़ रहा है. जबकि एससीइआरटी व एनसीइआरटी की किताब एक हजार के भीतर ही मिल जायेंगे. एनसीइआरटी की वर्ग तीन के गणित विषय की किताब का मूल्य 75 रूपये है. जबकि निजी प्रकाशन के किताब का मूल्य 320 रूपये है. एससीइआरटी व एनसीईआरटी समय में नहीं उपलब्ध कराती पुस्तकें- एससीइआरटी व एनसीईआरटी की किताबों के संचालन के संबंध में निजी विद्यालयों का अपना तर्क है. प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसियेशन के सचिव शिवजी प्रसाद का दावा है कि समय से एससीइआरटी व एनसीइआरटी किताबें मुहैया कराने में सक्षम नहीं है. निजी प्रकाशन को सरकार कागज पर कोई सबसिडी नहीं देती है. ऐसे में किताबोंं का महंगा होना लाजमी है.

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Author: DEEPAK MISHRA

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