15 लाख से कम के विभागीय काम पर भी लगी रोक

नगर निकायों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने बड़ा निर्णय लिया है. विभाग ने 15 लाख रुपये तक के विभागीय कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है.अब नगर परिषद और नगर पंचायतों में सभी योजनाओं का क्रियान्वयन इ-टेंडर के माध्यम से ही होगा.

विवेक कुमार सिंह, सीवान. नगर निकायों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने बड़ा निर्णय लिया है. विभाग ने 15 लाख रुपये तक के विभागीय कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है.अब नगर परिषद और नगर पंचायतों में सभी योजनाओं का क्रियान्वयन इ-टेंडर के माध्यम से ही होगा. नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 24 अगस्त 2023 को जारी पूर्व आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है. पहले 15 लाख रुपये तक के कार्य टेबल टेंडर या विभागीय प्रक्रिया से कराए जाते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है.यदि किसी योजना का कार्य अभी तक प्रारंभ नहीं हुआ है तो विभागीय तरीके से उसका कार्यान्वयन नहीं किया जाएगा और न ही कोई नया कार्यादेश जारी होगा.इस निर्णय के बाद नगर परिषद सीवान सहित जिले की अन्य नगर पंचायतों में हलचल तेज हो गई है. दो इओ के कार्यकाल में 18 सौ योजनाओं की दी गई थी प्रशासनिक स्वीकृति पिछले दो कार्यपालक पदाधिकारियों के कार्यकाल में 1800 से अधिक योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी. आरोप यह भी है कि कई योजनाओं को तोड़कर छोटे-छोटे हिस्सों में प्रस्तुत किया गया ताकि उन्हें 15 लाख की सीमा के अंदर रखकर विभागीय कार्य के रूप में स्वीकृति मिल सके. इससे न केवल नियमों की अनदेखी हुई, बल्कि कार्यों की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठे.डीएम विवेक रंजन मैत्रेय ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया था.उन्होंने नगर विकास एवं आवास विभाग को पत्र लिखकर यह सवाल उठाया था कि राशि उपलब्ध नहीं रहने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति कैसे दी गई. उन्होंने संबंधित कार्यपालक पदाधिकारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने की अनुशंसा भी की थी. डीएम के पत्र के कुछ ही दिनों बाद विभाग ने विभागीय कार्यों पर रोक लगाने का निर्णय ले लिया. गुणवत्ता को लेकर पहले भी मिलती रही है शिकायतें नगर परिषद में पहले भी विभागीय कार्यों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं.कई सड़कों के निर्माण के छह माह के भीतर ही दरकने और उखड़ने की खबरें सामने आई थीं.स्थानीय लोगों का आरोप रहा है कि अधिकारियों और कुछ खास लोगों की मिलीभगत से योजनाओं में मनमानी की गई और करोड़ों रुपये के कार्य बिना पारदर्शी प्रक्रिया के करा दिए गए.तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव के निलंबन के बाद 76 विभिन्न योजनाओं के कार्यादेश जारी होने का मामला भी सुर्खियों में आया था.

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By DEEPAK MISHRA

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