Sheikhpura Kidnapping Case : शेखपुरा में अपहरण के मामले में उत्पाद मामलों के विशेष न्यायाधीश सतीश कुमार झा की अदालत ने दो दोषियों को 10-10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनायी है. अदालत ने दोनों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. दोषी मंटू कुमार और सूरज कुमार घटना के दो दिन बाद पांच अगस्त 2025 से ही जेल में बंद हैं.
कार में बांधकर ले जा रहे थे शेखपुरा की ओर
अभियोजन के अनुसार तीन अगस्त 2025 को मोहली थाना क्षेत्र के गोहदा गांव निवासी ग्रामीण चिकित्सक राजो रजक के पुत्र मनोज कुमार अरियरी प्रखंड मुख्यालय स्थित अपने क्लीनिक खोलने के लिए घर से निकले थे. रास्ते में कार सवार मंटू कुमार, सूरज कुमार और उनके अन्य साथियों ने कथित तौर पर उनका अपहरण कर लिया.
आंख, मुंह, हाथ-पैर बांधकर बनाया बंधक
अपहरण के बाद आरोपित मनोज कुमार को कार में आंख, मुंह, हाथ और पैर बांधकर शेखपुरा की ओर ले जा रहे थे. इसी दौरान हुसैनाबाद पेट्रोल पंप के पास उनकी कार खराब हो गयी. उसी समय डायल 112 की पुलिस टीम की नजर भी कार पर पड़ी.
पुलिस को देखते ही भागने लगे आरोपित
पुलिस के अनुसार मनोज कुमार के शोर मचाने पर अपहरणकर्ता भागने लगे. इसके बाद पुलिस ने उन्हें आरोपितों के चंगुल से मुक्त कराया. गंभीर मारपीट में चोट लगने के कारण मनोज कुमार को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया.
कार से बरामद हुई शराब
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कार की तलाशी ली तो उसमें शराब बरामद हुई. इसी वजह से मामले का न्यायिक विचारण उत्पाद मामलों के विशेष न्यायाधीश की अदालत में चला. कार के मालिक के सत्यापन और कार व मोबाइल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस आरोपितों तक पहुंची.
कार और मोबाइल की जानकारी से हुई पहचान
मंटू कुमार शेखपुरा जिले के मोहली थाना क्षेत्र के गोहदा गांव निवासी गोपाल तांती का पुत्र है. वहीं दूसरा दोषी सूरज कुमार नालंदा जिले के बिंद थाना क्षेत्र के इब्राहिमपुर गांव का रहने वाला है. पुलिस ने तकनीकी जानकारी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया था.
13 गवाहों की अदालत में करायी गयी गवाही
मनोज कुमार के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने अनुसंधान पूरा करने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया. अभियोजन पक्ष ने मामले में पुलिस पदाधिकारियों, पीड़ित और उसके परिजनों समेत 13 लोगों की गवाही करायी. तकनीकी सेल के अधिकारी और अन्य पुलिस पदाधिकारियों के साक्ष्य भी अदालत में प्रस्तुत किये गये.
अलग-अलग धाराओं में दोषी करार
अभियोजन पक्ष के अनुसार न्यायाधीश ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 127(2), 109 और 140 तथा उत्पाद अधिनियम की धारा 30ए के तहत दोषी माना. अदालत ने विभिन्न धाराओं के तहत अलग-अलग सजा सुनायी. इसमें धारा 140 के तहत 10 साल की सजा और उत्पाद अधिनियम की धारा 30ए के तहत पांच साल की सश्रम कारावास समेत अर्थदंड शामिल है.
28 अगस्त को दोषी ठहराये गये थे दोनों
विशेष लोक अभियोजक अरविंद कुमार ने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी करते हुए अदालत ने पिछले महीने 28 तारीख को दोनों आरोपितों को दोषी करार दिया था. सोमवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया.
बचाव पक्ष ने कम सजा देने की मांग की
सजा के बिंदु पर दोषियों के अधिवक्ताओं ने अदालत में लंबी दलील पेश की. बचाव पक्ष ने दोनों के पहले अपराध का हवाला देते हुए अदालत से कम से कम सजा देने की मांग की.
अभियोजन ने कड़ी सजा की मांग की
वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अरविंद कुमार ने मामले को समाज के प्रति गंभीर अपराध बताते हुए दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की. उनका कहना था कि सख्त सजा से अपराधियों में कानून का भय कायम होगा और किसी को अपहरण जैसे अपराध का साहस नहीं होगा.
खुली अदालत में सुनायी गयी सजा
सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने दोनों दोषियों को सजा सुनायी. खुली अदालत में सजा सुनाये जाने के बाद दोनों को दोबारा मंडल कारा भेज दिया गया. दोनों पहले से न्यायिक हिरासत में हैं.
