बुजुर्गों की भीड़ में नवजातों का नहीं बन पा रहा जन्म प्रमाणपत्र

नगर निगम के जन्म-मृत्यु काउंटर पर लग रहा लोगों की भीड़, एसआइआर का दिख रहा असर

सासाराम

नगर.

नगर निगम का जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र काउंटर लोगों की अधिक भीड़ से जूझ रहा है. निगम कार्यालय में सोमवार को रजीस्ट्रार बैठते हैं. इसलिए भीड़ अधिक थी. नीचे से लेकर ऊपर तक लोगों की भीड़ लगी हुई थी. 1965 में जन्म लेने वाले भी रजिस्ट्रार के पास जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन दिये हैं. ऐसे मामले देखकर रजिस्ट्रार आवेदकों को अपने समक्ष बुलाकर उनका प्रमाणपत्र बना रहे हैं. साथ ही इसकी वजह भी पूछ रहे हैं. क्योंकि, इनलोगों में 90 प्रतिशत लोग अपने आवेदन में खुद को अनपढ़ और अपना जन्म घर पर लिखे हुए हैं. ये लोग अपने जन्म तिथि का कोई साक्ष्य दस्तावेज के रूप में नहीं दे रहे हैं. केवल पार्षद के लेटर हेड पर अनुशंसा और आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका, विकास मित्र का हस्ताक्षर और एक शपथ पत्र संलग्न हैं. इनकी भीड़ की वजह से कई नवजातों का जन्म प्रमाणपत्र भी बनाने में देरी हो रही है. जन्म प्रमाणपत्र बनाने के लिए पहुंच रही बुजुर्गों की भीड़ की बड़ी वजह एसआइआर को माना जा रहा है. कुछ पार्षदों ने बताया कि हमारे मुहल्ले में कई मुस्लिम परिवार रहते हैं, जो अपना जन्म प्रमाणपत्र बनाने के लिए पहुंच रहे हैं. वह हमलोगों से कई वर्ष बड़े हैं. ऐसे में उनसे जन्म प्रमाणपत्र बनाने का कारण पूछ रहे हैं, तो वह पहले झिझक रहे हैं, फिर बोल रहे हैं कि बेटी बाहर रहती है. उसी ने मांगा, तो उसके लिए बनवा रहे हैं. हमलोग आंगनबाड़ी व अन्य हस्ताक्षार को देखते हुए यह लिखकर दे रहे हैं कि उनके कहे अनुसार इनका जन्म यहां हुआ है. यहीं मैटर लिखकर हम अपने लेटर पैड पर दे दे रहे हैं. एक पार्षद ने बात-बात में बताया कि एसआइआर की वजह से इसके मामले बढ़े हैं. कई लोगों को मैंने अपने मुहल्ले में खुद समझाया है कि इसकी कोई जरूरत नहीं है. अन्य दस्तावेज लगा दीजिए हो जायेगा. लेकिन, कुछ लोग समझने को तैयार नहीं है.

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Published by: Panchdev kumar

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