सारण में चेहल्लुम पर निकला मातमी जुलूस, 'या हुसैन' के नारों से गूंजा शहर

सारण जिले में हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में चेहल्लुम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर मातमी जुलूस निकला, जिसमें 'या हुसैन' के नारे गूंजे. जुलूस ने मानवता, न्याय और अमन का संदेश दिया, साथ ही हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल पेश की.

Saran News: हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में मंगलवार को जिलेभर में श्रद्धा और अकीदत के साथ चेहल्लुम मनाया गया. इस अवसर पर शहर के दहियावां शिया कॉलोनी स्थित स्व. तकी नवाब के अजाखाने से अंजुमन-ए-जाफरिया के तत्वावधान में भव्य मातमी जुलूस निकाला गया. "या हुसैन-या हुसैन" के गूंजते नारों और दर्दभरे नौहों के बीच श्रद्धालुओं ने कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की.

अलम, ताबूत और झूले के साथ निकला जुलूस

मातमी जुलूस विभिन्न घरों में रखे गए शबीहे अलम, ताबूत, हजरत अब्बास का अलम, मासूम अली असगर का झूला तथा इमाम हुसैन के प्रतीकात्मक ताबूत को शामिल करते हुए छोटा इमामबाड़ा पहुंचा. इसके बाद जुलूस शिया मस्जिद, महमूद चौक, थाना चौक, साहबगंज, कपड़ा पट्टी, खनुआ, करीमचक, आजाद रोड, कटहरी बाग होते हुए तेलपा तकिया तक गया.

जंजीरी मातम और नौहों से भावुक हुआ माहौल

महमूद चौक पर बच्चों और युवाओं ने जंजीरी मातम कर कर्बला की घटना का प्रतीकात्मक चित्र प्रस्तुत किया. जुलूस में गुलाम पंजतन, तारा भाई, डॉ. असकरी रजा, शकील हैदर, बबलू राही, कल्बे अब्बास, अशरफ हैदर, गुड्डू, जफर अब्बास और समीर हैदर सहित अन्य लोगों ने नौहा पढ़कर मातम कराया.

मानवता और अमन का दिया संदेश

जुलूस के दौरान विभिन्न स्थानों पर प्रवचनों में वक्ताओं ने कहा कि इमाम हुसैन ने कर्बला में अपने बलिदान से मानवता, न्याय और सत्य की रक्षा का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश आज भी समाज को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और मानवता की रक्षा की प्रेरणा देता है.

हिंदू-मुस्लिम एकता की दिखी मिसाल

जुलूस मार्ग में विभिन्न स्थानों पर मुस्लिम समाज के साथ-साथ हिंदू समाज के लोगों ने भी सबील लगाकर मातमदारों के लिए ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक, बिस्कुट, चाय और कॉफी की व्यवस्था की. छोटे-छोटे बच्चे "हाय सकीना-हाय प्यास" की सदा लगाते हुए कर्बला की याद को ताजा करते नजर आए.

जिलेभर में निकले ताजिया और सिपल जुलूस

अहले सुन्नत वल जमाअत की ओर से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ताजिया और सिपल जुलूस निकाले गए. जुलूस में युवाओं ने लाठी, तलवार, गदका सहित भारतीय पारंपरिक युद्ध कला का प्रदर्शन किया. विभिन्न स्थानों पर नजर-ओ-नियाज के साथ खीचड़ा का तबर्रुक भी वितरित किया गया.

पूरे दिन मुस्तैद रहा प्रशासन

चेहल्लुम जुलूस को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे. प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर दंडाधिकारी के साथ महिला एवं पुरुष पुलिस बल की तैनाती की गई थी. डीएम वैभव श्रीवास्तव और एएसपी अमित कुमार सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जिला नियंत्रण कक्ष से लगातार स्थिति की निगरानी करते रहे. जुलूस के दौरान यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सक्रिय रहा.

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By Nadim ahmad

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