जेल में 80 फीसदी पद रिक्त

Published at :02 Feb 2017 11:58 PM (IST)
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जेल में 80 फीसदी पद रिक्त

लापरवाही. विभाग की उदासीनता से जेल की सुरक्षा खतरे में सुरक्षा गार्ड उपलब्ध नहीं होने से अरुण साह नहीं भेजा जा सका गौसा जेल छपरा (सदर) : जेल मैनुअल को नजर अंदाज कर गृहरक्षकों को सुरक्षा का जिम्मा देने, पुलिस के असहयोगात्मक रवैये के कारण कारा में बंद अपराधियों की हर कारगुजारियों पर नकेल कसना […]

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लापरवाही. विभाग की उदासीनता से जेल की सुरक्षा खतरे में

सुरक्षा गार्ड उपलब्ध नहीं होने से अरुण साह नहीं भेजा जा सका गौसा जेल
छपरा (सदर) : जेल मैनुअल को नजर अंदाज कर गृहरक्षकों को सुरक्षा का जिम्मा देने, पुलिस के असहयोगात्मक रवैये के कारण कारा में बंद अपराधियों की हर कारगुजारियों पर नकेल कसना कारा प्रशासन के लिए मुश्किल भरा काम हो रहा है. कारा प्रशासन के लिए ‘एक ओर कुआं तो दूसरी ओर खाई’ वाली स्थिति बन गयी है. आखिर विभागीय स्तर व जिला पुलिस प्रशासन ईमानदारी पूर्वक सहयोग नहीं करेगा तो किन परिस्थितियों में छपरा जेल में रहने वाले बंदियों पर नकेल कसी जायेगी. कहने के लिए तो प्रशासन तिमाही या छमाही छपरा कारा में विभिन्न वार्डों की तलाशी लेता है.
इस दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल, सिम, चार्जर या अन्य आपत्तिजनक सामान पकड़े जाते हैं. परंतु, अपनी देख-रेख में छापेमारी करने वाले जिला व पुलिस प्रशासन के पदाधिकारी यह भी नहीं बता पाते कि आखिर ये दर्जन भर मोबाइल किस बंदी के पास से पकड़े जाते हैं. अंतत: कारा प्रशासन अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कर कर्तव्य की इति श्री मान लेते हैं. यही नहीं आधा दर्जन राजनीतिक संरक्षित या पुलिस के कुछ पदाधिकारियों के चहेते अपराधी कथित रूप से कारा प्रशासन पर भारी पड़ते हैं. यदि कारा में कोई घटना होती है तो निश्चित तौर पर कारा प्रशासन पर उंगली उठती है, परंतु ऐसे मनबढु बंदियों को कथित रूप से शह कहीं-न- कहीं रसूख वाले लोगों की रहती है.
अरुण के मामले में कई बार कारा प्रशासन के आग्रह पर भी नहीं मिला बाहर भेजने के लिए सुरक्षा गार्ड : मंडल कारा छपरा में विगत एक वर्ष से बंद विभिन्न मामलों का सरगना बताया जाने वाला अरुण साह जनवरी ,2016 में ही मंडल कारा छपरा में आया है. इसके विरुद्ध राजस्थान के गौसाकोर्ट में भी मुकदमा चल रहा है. उसे गौसा कोर्ट में पेशी के लिए वहां से कोर्ट प्रशासन द्वारा पत्राचार किये जाने के बाद छपरा कारा प्रशासन ने उसे गौसा भेजने के लिए सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने का आग्रह पुलिस अधीक्षक से किया था. पुलिस सूत्रों के अनुसार 25 अगस्त, 2016 को छपरा मंडल कारा के काराधीक्षक द्वारा पत्र भेजा गया था,
इसके बाद अबतक सुरक्षा गार्ड हेतु आधा दर्जन बार कारा प्रशासन ने पत्राचार किया, परंतु पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने के मामले में रुचि नहीं दिखायी. छपरा नगर थाना क्षेत्र के सलेमपुर के रहने वाले अरुण साह पर अब पुलिस खुलासा कर रही है कि छपरा में बरतन व्यवसायी, दिघवारा में आभूषण व्यवसायी तथा अन्य अपराधिक मामलों में अरुण साह का गिरोह काम कर रहा है तथा अब भी सक्रिय है. यदि पुलिस प्रशासन ने कारा प्रशासन के आग्रह पर सुरक्षा गार्ड उपलब्ध करा दिया होता, तो अरुण गिरोह के सदस्य का शिकार छपरा एवं दिघवारा के व्यवसायी नहीं बनते. निश्चित तौर पर छपरा जेल में रहने के कारण अरुण की गतिविधियां जारी होने की बात सामने आ रही हैं.
जिले के निवासी कर्मियों को मंडल कारा में ड्यूटी नहीं देनी है :
जेल मैनुअल के अनुसार कारा में किसी भी स्थिति में जिले के निवासी कर्मियों को मंडल कारा में ड्यूटी नहीं देनी है. परंतु, जेल के पद रिक्त होने, चार में तीन सहायक जेलर के पद रिक्त होने तथा 100 में 67 कक्षपालों के पद रिक्त होने की वजह से निश्चित तौर पर कारा प्रशासन के लिए जेल की विधि व्यवस्था बनाये रखना मुश्किल है. वहीं जेल प्रशासन के निर्देश पर 35 होमगार्ड के जवानों को छपरा जेल के सुरक्षा में लगाया गया है, जो सारण जिले के ही किसी-न-किसी गांव के निवासी है.
ऐसी स्थिति में मंडल कारा के अंदर ड्यूटी करने के कारण अधिकतर होम गार्ड के जवानों का करीबी या गांव -जवार का बंदी उनसे परिचय का लाभ उठाकर जेल मैनुअल की धज्जियां उड़ाने से बाज नहीं आता. वहीं कारा की सुरक्षा में लगाये गये पुलिस के सुरक्षा गार्ड भी पुलिस मैनुअल को नजर अंदाज करते हैं. तभी तो मंगलवार की रात पीएमसीएच में भरती छपरा जेल के बंदी मुन्ना ठाकुर की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने पीएमसीएच के एक वार्ड से दूसरे वार्ड में इलाज कराने के लिए ले जाने के बदले छपरा जेल लेकर पहुंच गये.
जबकि पीएमसीएच प्रशासन द्वारा उनको डिस्चार्ज भी नहीं किया गया था. हालांकि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कारा प्रशासन ने मुन्ना ठाकुर को पुन: वापस कर दिया. ऐसी स्थिति में नियम के विरुद्ध मुन्ना ठाकुर को छपरा जेल पर लाने वाले सुरक्षा कर्मियों के विरुद्ध अब देखना है कि जिला पुलिस प्रशासन कौन-सा कदम उठाता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
सुरक्षाकर्मी के अभाव में विभाग के निर्देश पर सुरक्षा गार्ड लगाये गये हैं. वहीं कुख्यात अरुण साह को राजस्थान के गौसा कोर्ट में पेशी के लिए पूर्व में पत्राचार किया गया है. सुरक्षा गार्ड उपलब्ध होते ही उसे राजस्थान भेज दिया जायेगा.आपत्तिजनक सामान रखने वाले बंदियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है.
सुभाष प्रसाद, काराधीक्षक, मंडल कारा
अरुण साह को सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने तथा बिना पीएमसीएच से डिस्चार्ज किये बंदी मुन्ना ठाकुर को छपरा जेल में लाने के मामले में तैनात सुरक्षाकर्मी के संबंध में आवश्यक कदम उठाया जायेगा. पुलिस प्रशासन की नजर मंडल कारा के बंदियों की गतिविधियों पर है.
पंकज कुमार राज, एसपी, सारण
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