समस्तीपुर में बिजली व्यवस्था 'वेंटिलेटर' पर, इंजीनियर साहब रूम से लेते हैं 'फोटो-थैरेपी', जनता झेल रही ब्लैकआउट!

समस्तीपुर में लगातार बिजली फॉल्ट और ब्रेकडाउन से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है. ई पावर हाउस से जुड़े 33 केवीए केबल में एक महीने के दौरान छह बार खराबी आने से कई इलाकों में घंटों बिजली बाधित रही. नाराज उपभोक्ता अब उच्च अधिकारियों से शिकायत की तैयारी कर रहे हैं. पढ़ें पूरी खबर...

समस्तीपुर से प्रकाश कुमार की रिपोर्ट

समस्तीपुर शहर में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं की नाराजगी बढ़ती जा रही है. मेंटेनेंस और सुधार कार्यों के दावों के बावजूद शहरवासियों को लगातार बिजली कटौती और ब्रेकडाउन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. स्थिति यह है कि कभी 33 केवीए तो कभी 11 केवीए लाइन में फॉल्ट आने से कई इलाकों की बिजली घंटों बाधित रहती है.

जानकारी के अनुसार, ई पावर हाउस से जुड़े 33 केवीए केबल में अकेले जून महीने के दौरान अब तक छह बार फॉल्ट आ चुका है. बार-बार आने वाली तकनीकी खराबियों के कारण शहर के विभिन्न इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है.

साहब के आवास से चल रही ‘व्हाट्सएप मॉनिटरिंग’


विभागीय सूत्रों और मानव बलों की मानें तो जब रात में कोई बड़ा फॉल्ट होता है, तो पेट्रोलिंग में ही घंटों बीत जाते हैं. जिम्मेदार अभियंता खुद मौके पर जाने के बजाय अपने आवास से ही मॉनिटरिंग करते हैं. लाइनमैन से मौके की फोटो व्हाट्सएप पर मंगवाकर साहब अपटूडेट हो जाते हैं. ग्राउंड स्टाफ का दर्द है कि 33 केवीए ब्रेकडाउन होने के बाद ग्रिड से शटडाउन की प्रक्रिया शुरू होने में ही एक-एक घंटा लग जाता है. फॉल्ट केबल का हो, तो मुसीबत दोगुनी हो जाती है. जर्जर संचरण व्यवस्था के कारण फॉल्ट किसी एक फीडर में होता है, लेकिन सप्लाई कई अन्य फीडरों की भी बंद करनी पड़ती है.

​डेटा की बाजीगरी में साहब को महारत


शहर में हाहाकार की मुख्य वजह केबल में आग लगना, ब्रेकडाउन और जंफर गलना है. जानकारों का कहना है कि अगर शटडाउन और ब्रेकडाउन की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो व्यवस्था की कलई खुल जाएगी. लेकिन इस लॉगबुक और डेटा में हेरफेर करने में संबंधित अभियंताओं को महारत हासिल है. कागजों पर आपूर्ति दुरुस्त दिखाकर वरीय अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है.

अधिकारियों से जवाबदेही की मांग

उपभोक्ताओं का कहना है कि बार-बार सामने आ रही तकनीकी समस्याओं की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, ताकि वास्तविक कारणों का पता चल सके और स्थायी समाधान निकाला जा सके. सूत्रों के मुताबिक, बिजली व्यवस्था से नाराज कुछ उपभोक्ता अब अपनी शिकायत सीधे विभाग के प्रबंध निदेशक (एमडी) तक पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Sarfaraz Ahmad

सरफराज अहमद IIMC से प्रशिक्षित पत्रकार हैं. राजनीति, समाज और हाइपरलोकल मुद्दों पर लिखते हैं. क्रिकेट और सिनेमा में गहरी रुचि रखते हैं. बीते तीन वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत हैं।

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