समस्तीपुर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कृषि अभियंत्रण एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय स्थित सिंचाई एवं जल निकास विभाग में 22 सितंबर 2026 को “सतत कृषि के लिए नवाचारी सिंचाई जल प्रबंधन विकल्प” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना सिंचाई जल प्रबंधन, पूसा की ओर से आयोजित किया गया.
कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिभागियों के पंजीकरण से हुई. इसके बाद गणमान्य अतिथियों के स्वागत और दीप प्रज्वलन के साथ उद्घाटन सत्र शुरू हुआ. कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए सिंचाई जल प्रबंधन के प्रधान अन्वेषक डॉ. रवीश चंद्र ने स्वागत उद्बोधन दिया. डॉ. रवीश चंद्र, प्रधान अन्वेषक तथा डॉ. मुकेश कुमार, सह-अन्वेषक, सिंचाई जल प्रबंधन ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रूपरेखा से उपस्थित लोगों को अवगत कराया.
सतत कृषि के लिए जल प्रबंधन पर जोर
डॉ. आर. सुब्बैया, अधिष्ठाता, कृषि अभियंत्रण एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय ने जल संरक्षण के महत्व एवं सिंचाई की आधुनिक पद्धतियों पर प्रकाश डालते हुए सतत कृषि की आवश्यकता पर बल दिया.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. ए.के. सिंह, निदेशक (अनुसंधान) ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सतत कृषि के लिए जल प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने उपस्थित वैज्ञानिकों एवं किसानों को मार्गदर्शन दिया. कार्यक्रम का मंच संचालन शिल्पा, सह-अन्वेषक, सिंचाई जल प्रबंधन ने किया.
रबी फसलों और आधुनिक सिंचाई तकनीक की दी जानकारी
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने किसानों एवं प्रतिभागियों को व्यावहारिक जानकारी दी. डॉ. मुकेश कुमार ने “रबी फसलों हेतु सिंचाई जल प्रबंधन” विषय पर व्याख्यान दिया.
वहीं, डॉ. रवीश चंद्र ने “उच्च जल उत्पादकता प्राप्ति हेतु नवाचारी सिंचाई जल प्रबंधन रणनीतियों” पर विस्तृत जानकारी साझा की. डॉ. अमरकांत गौतम ने “ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली” पर व्याख्यान प्रस्तुत किया.
एक-एक बूंद पानी के उचित उपयोग पर जागरूकता
आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों में जल की एक-एक बूंद के उचित उपयोग तथा आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इससे सतत कृषि को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.
वैज्ञानिक, शोधार्थी और किसान रहे मौजूद
कार्यक्रम में डॉ. ए.के. सिंह, निदेशक (अनुसंधान), डॉ. आर. सुब्बैया, अधिष्ठाता, कृषि अभियंत्रण एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, डॉ. मुकेश कुमार, प्राध्यापक एवं सह-अन्वेषक, अनुसंधान निदेशालय, डॉ. रवीश चंद्र, प्रधान अन्वेषक, सिंचाई जल प्रबंधन, सुश्री शिल्पा, सह-अन्वेषक, सिंचाई जल प्रबंधन, डॉ. आर. सुरेश, विभागाध्यक्ष, मृदा एवं जल संरक्षण अभियंत्रण विभाग, डॉ. देवेंद्र सिंह, विभागाध्यक्ष, खाद्य प्रसंस्करण अभियंत्रण विभाग तथा डॉ. अमरकांत गौतम, सहायक प्राध्यापक, सिंचाई एवं जल निकास अभियंत्रण विभाग सहित विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे.
