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जलस्तर के संरक्षण में कोसी नदी की भूमिका महत्वपूर्ण

Updated at : 26 May 2024 6:20 PM (IST)
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जलस्तर के संरक्षण में कोसी नदी की भूमिका महत्वपूर्ण

जलस्तर के संरक्षण में कोसी नदी की भूमिका महत्वपूर्ण

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आरएम कॉलेज में कोसी क्षेत्र में संस्कृति, समाज, नदी व पर्यावरण विषय पर सेमिनार का हुआ आयोजन सहरसा. राजेन्द्र मिश्र महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में भूगोल विभाग व आइक्यूएससी के संयुक्त तत्वावधान में कोसी भौगौलिक क्षेत्र में संस्कृति, समाज, नदी व पर्यावरण विषय पर एकदिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमिनार का उद्घाटन प्रधानाचार्य प्रो डॉ अमर नाथ चौधरी, आइक्यूएसी समन्वयक डॉ ललित नारायण मिश्र, वर्सर डॉ किशोर नाथ झा, मुख्य अतिथि सह पूर्व विभागाध्यक्ष समाजशास्त्र विभाग डॉ विनय कुमार चौधरी, विशिष्ठ अतिथि सह पुर्व विभागाध्यक्ष भूगोल विभाग डॉ देवचंद्र चौधरी, विषय विशेषज्ञ डॉ कामाख्या नारायण सिंह एवं डॉ अमरेन्द्र सिंह, डॉ सुमन कुमार झा, डॉ सुदीप कुमार झा, डॉ वीणा कुमारी मिश्र, डॉ अक्षय कुमार चौधरी, डॉ आलोक कुमार झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों को पाग, चादर व पौधे प्रदान कर किया गया. सेमिनार का आयोजन सीआईए के अधीन भूगोल विभाग के स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं एवं देवता निभा राजनारायण फाउंडेशन द्वारा आइक्यूएसी को शैक्षिक सहयोग के प्रसंग में किया गया. मंच संचालन स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा कृष्णा कुमारी ने किया. प्रधानाचार्य डॉ अमर नाथ चौधरी ने कहा कि भूगोल विभाग के स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राएं काफी प्रतिभाशाली एवं शैक्षिक क्रियाकलाप के प्रति काफी जागरूक हैं. चतुर्थ सेमेस्टर का कोर्स अब समाप्त होने को है व जल्दी ही विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा आयोजित कर ली जायेगी. उसके बाद हमारे महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं देश व विदेश के विभिन्न संस्थानों में जाकर शोध कार्य करेंगे. विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में अपने आलेख प्रस्तुत करेंगे. यूजीसी द्वारा अनुसूचित जर्नल में आलेख छपेंगे. आपके अच्छे प्रदर्शन से हमारे महाविद्यालय को गौरवान्वित होने अवसर मिलेगा. मुख्य अतिथि डॉ विनय कुमार चौधरी ने कोसी परियोजना के परिपेक्ष्य में कोसी को बांधे जाने एवं इससे यहां की कृषि व्यवस्था, सलाना बाढ़ से व बांध टूटने के बाद हुए भीषण तबाही, सिल्ट के जमा होने से उत्पन्न समस्या के प्रति अपने विचार प्रस्तुत किया. आइक्यूएसी समन्वयक डॉ ललित नारायण मिश्र ने कहा कि चतुर्थ सेमेस्टर की कृष्णा कुमारी, वैभव झा, गौरव, विशाल, सूरज ने सेमेस्टर के सभी छात्र-छात्राओं ने मिलकर टीम भावना से जिस तरह से इस कार्यक्रम को सफल बनाया है उससे महाविद्यालय के सभी संकाय के छात्र-छात्राओं में सेमिनार के आयोजन करने, प्रतिभागिता लेने एवं अपने विषय में पद्धतिशास्त्रीय अध्ययन व तथ्यात्मक आलेख प्रस्तुत करने के प्रति ललक बढ़ेगी. यह महाविद्यालय में अच्छे शैक्षिक वातावरण को समृद्ध करने के लिए महत्वपूर्ण है. डॉ देवचंद्र चौधरी ने कहा कि कोसी क्षेत्र के भौगौलिक विश्लेषण में इसके सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक पक्ष को समझना है. कोसी नदी को बिहार का शोक तो कहा जाता है. लेकिन इस क्षेत्र में जलस्तर के संरक्षण में कोसी नदी की भूमिका महत्वपूर्ण है. विषय विशेषज्ञ डॉ कामाख्या नारायण सिंह ने कोसी बाढ़ की विभीषिका एवं इससे यहां के जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव पर प्रकाश डाला. इस मौके पर डॉ किशोर नाथ झा, डॉ सुमन कुमार झा, डॉ वीणा मिश्रा, डॉ सुदीप कुमार झा, डॉ अक्षय कुमार चौधरी, डॉ अलोक कुमार ने भी अपने विचार रखे. भूगोल विभाग की छात्र-छात्राओं में कृष्णा, वैभव, चंचल, दीपा, प्रियांशी, पूजा, प्रीति, चांदनी, शबा, श्वेता, अर्चना, अल्का, अनुपम, आदर्श, अनिल, गौरव, विशाल, सूरज एवं अन्य लोगों ने भी कोसी नदी एवं पर्यावरण से संबंधित विभिन्न थीम विषयों पर अपने आलेख प्रस्तुत किये.

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