सहरसा में चैनपुर का प्राचीन मां काली मंदिर, जहां भक्तों की हर मुराद पूरी होने की है मान्यता

Aaj Ka Darshan: सहरसा के इस प्राचीन मां काली मंदिर में नवरात्र और अमावस्या पर उमड़ता है आस्था का सैलाब, दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

Aaj Ka Darshan: सहरसा से विनय कुमार मिश्र की विशेष रिपोर्ट. सहरसा जिले के चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर वर्षों से श्रद्धा, शक्ति साधना और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. कोसी क्षेत्र समेत आसपास के कई जिलों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां काली के दरबार में माथा टेकते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से मां के दरबार में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि प्रतिदिन यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है.

मंदिर में प्रवेश करते ही महसूस होती है अद्भुत शांति

चैनपुर स्थित मां काली मंदिर अपने आध्यात्मिक वातावरण और प्राचीन परंपराओं के लिए विशेष पहचान रखता है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को शांति और भक्ति का अनोखा अनुभव होता है. सुबह और शाम होने वाली विशेष आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. घंटियों की गूंज और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है.

स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर काफी प्राचीन है और यहां मां काली की पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है. भक्त यहां दीप जलाकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. मंदिर परिसर की साफ-सफाई और आकर्षक सजावट भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है.

नवरात्र और काली पूजा में दिखता है भव्य नजारा

नवरात्र, अमावस्या और काली पूजा के अवसर पर चैनपुर स्थित मां काली मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. सुबह से लेकर देर रात तक पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार का दौर चलता रहता है. इस दौरान मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूब जाता है.

विशेष अवसरों पर मां काली का भव्य श्रृंगार किया जाता है और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न होती है. शाम की महाआरती में शामिल होने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं. यहां मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु बलि भी अर्पित करते हैं. दीपावली के समय यहां सैकड़ों की संख्या में छाग की बलि दी जाती है.

आस्था के साथ पर्यटन का भी केंद्र

चैनपुर का यह प्राचीन मां काली मंदिर अब धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है. यहां आने वाले लोग पूजा-अर्चना के साथ मंदिर की ऐतिहासिक परंपरा और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि मां काली के दरबार से कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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