एनडीए में राज्यसभा सीट शेयरिंग की हलचल, जीतन राम मांझी ने याद दिलाया पुराना वादा, बोले– इंतजार करेंगे

Rajya Sabha Election 2026: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने आगामी राज्यसभा चुनावों को लेकर कहा है कि उनकी पार्टी को गठबंधन में पहले जो प्रतिनिधित्व देने का आश्वासन मिला था, उसे पूरा होने की उम्मीद है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कोई मांग नहीं कर रहे, बल्कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के फैसले का इंतजार करेंगे. उनके इस बयान ने बिहार NDA में सीट बंटवारे को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है.

Rajya Sabha Election 2026: बिहार की सियासत में इन दिनों राज्यसभा की खाली हो रही 5 सीटों को लेकर बिसात बिछनी शुरू हो गई है. केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने गठबंधन के भीतर सस्पेंस बढ़ा दिया है.

जीतन राम मांझी ने स्पष्ट तौर पर उस वादे की याद दिलाई है, जिसमें उनकी पार्टी को 2 लोकसभा और 1 राज्यसभा सीट देने की बात कही गई थी. मांझी का यह कहना कि ‘हम मांग नहीं करेंगे, बल्कि इंतजार करेंगे’ राजनीतिक गलियारों में एक मूक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है. जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं, क्या एनडीए नेतृत्व अपने इस पुराने साथी की उम्मीदों पर खरा उतरेगा या छोटे दलों की दावेदारी सीट बंटवारे के समीकरण को उलझा देगी?

मांझी का ‘वेट एंड वॉच’ कार्ड और गठबंधन की चुनौती

जीतन राम मांझी का यह कहना कि “हम आखिरी तक देखेंगे कि वे देते हैं या नहीं,” यह संकेत देता है कि हम (HAM) इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है. मांझी का यह रुख तब सामने आया है जब बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए दावेदारों की सूची लंबी होती जा रही है.

ऐसे में जीतन राम मांझी का शांत रहना दरअसल गठबंधन के बड़े दलों पर एक नैतिक दबाव बनाने की कोशिश मानी जा रही है.

सीट शेयरिंग का पेच- छोटे दलों की बढ़ती दावेदारी

बिहार एनडीए के लिए राज्यसभा का यह चुनाव किसी परीक्षा से कम नहीं है. एक तरफ भाजपा और जदयू जैसे बड़े घटक दल हैं, तो दूसरी तरफ मांझी की पार्टी और अन्य छोटे सहयोगी अपनी हिस्सेदारी की उम्मीद लगाए बैठे हैं. जीतन राम की पार्टी पहले भी राज्यसभा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की इच्छा जता चुकी है.

मांझी ने साफ किया है कि वे सक्रिय रूप से मांग पत्र लेकर नहीं जाएंगे, लेकिन उनकी नजरें गठबंधन के हर फैसले पर टिकी हुई हैं.

क्या वादा निभाएगी बीजेपी-जेडीयू की जोड़ी?

बिहार की 5 राज्यसभा सीटों में से बहुमत के हिसाब से एनडीए मजबूत स्थिति में है, लेकिन असली चुनौती आंतरिक असंतोष को रोकने की है. जीतन राम मांझी का आधार वोट बैंक बिहार की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाता है, जिसे कोई भी गठबंधन नजरअंदाज नहीं करना चाहेगा.

अगर मांझी को राज्यसभा सीट नहीं मिलती है, तो यह संदेश जा सकता है कि एनडीए में छोटे दलों की उपेक्षा हो रही है.

बिहार की सियासत में ‘मार्च’ का महीना होगा खास

जैसे-जैसे फरवरी का अंत हो रहा है और मार्च की आहट सुनाई दे रही है, बिहार की राजनीति का पारा भी मौसम की तरह गर्म होने लगा है. मांझी के इस बयान के बाद अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दिल्ली में भाजपा के आलाकमान पर टिकी हैं.

क्या मांझी का यह सब्र उन्हें राज्यसभा तक पहुंचाएगा या फिर एनडीए के भीतर किसी नए फॉर्मूले पर सहमति बनेगी? फिलहाल, मांझी ने गेंद गठबंधन के पाले में डालकर सबको सोच में डाल दिया है.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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