पटना में प्रदूषित हवा का कहर, सांस फूलने के साथ जोड़ों में हो रहा दर्द, अस्थमा के मरीज बरतें ये सावधानी

डॉक्टरों के मुताबिक लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से गठिया जैसी ऑटोइम्यून बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. वहीं, डॉक्टर ऐसे मरीजों को दवाओं के साथ-साथ इन्हेलर व मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं.
पटना. बढ़ते मौसम व प्रदूषण के बीच पीएमसीएच, आइजीआइएमएस, पटना एम्स समेत अन्य सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी में सांस संबंधित रोगियों की संख्या बढ़ गयी है. इन मरीजों में सांस के साथ ही जोड़ों में दर्द की शिकायत भी देखने को मिल रही है. डॉक्टरों के मुताबिक लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से गठिया जैसी ऑटोइम्यून बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. वहीं, डॉक्टर ऐसे मरीजों को दवाओं के साथ-साथ इन्हेलर व मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं.
पीएमसीएच चेस्ट रोग विभाग के डॉ एससी झा ने बताया कि अस्पताल के ओपीडी में सांस संबंधित मरीजों की संख्या करीब 20 प्रतिशत बढ़ गयी है. उन्होंने बताया कि दीपावली के बाद से ही इस तरह के मरीज आना शुरू हो गये थे, जिन्हें खांसी, जुकाम और सांस लेने में कठिनाई हो रही है. डॉ सुभाष ने कहा कि हवा की गुणवत्ता खराब होने के साथ ही मौसम में बदलाव भी रोगियों की सांस संबंधित समस्या का एक प्रमुख कारण है. अस्पताल में ऐसे रोगी भी आ रहे हैं, जिन्हें पहले सांस संबंधित कोई समस्या नहीं थी. प्रदूषण से बचने के लिए ऐसे मरीजों को मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है.
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सांस लेने में दिक्कत और सीटी जैसी आवाज आना
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सीढ़ियां चढ़ने या तेज चलने पर खांसी शुरू हो जाना
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हंसने या गुस्सा होने पर खांसी आना नाक बजना, छाती में खिंचाव,
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रात और सुबह में सांस लेने में तकलीफ व जोड़ों में दर्द
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सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें
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एक्यूआइ इंडेक्स 200 से ज्यादा होने पर क्रिकेट, हॉकी, साइकिलिंग, मैराथन से परहेज करें
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प्रदूषण स्तर अधिक होने पर पार्क में दौड़ने और टहलने न जाएं
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प्रदूषण स्तर 300 से अधिक हो, तो लंबी दूरी की सैर न करें
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जब स्तर 400 से अधिक हो, तो घर के अंदर रहें, सामान्य सैर भी न करें
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बेहतर गुणवत्ता के मास्क का इस्तेमाल जरूरी है
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तरल पदार्थ लेते रहें और खुद को डिहाइड्रेट न होने दें
पटना शहर का एक्यूआइ बीते तीन दिनों से लगातार बढ़ रहा है और शहर की हवा खराब होते जा रही है. शाम होते साथ दिन की तुलना में शहर की हवा और भी खराब हो जाती है, क्योंकि तापमान में कमी आने से हवा का घनत्व बढ़ जाता है. इससे धुलकणों को ढोने की उसकी क्षमता बढ़ जाती है और वे हवा में अधिक समय तक तैरते रहते हैं. इससे लोगों पर उनका खराब असर अधिक पड़ता है. बीते बुधवार को शहर का एक्यूआइ 157 था और यह माॅडरेट श्रेणी में थी, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह नहीं था. जबकि गुरुवार को बढ़ कर यह 171 और शुक्रवार को 265 हो गया, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से खराब श्रेणी में माना जाता है.
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