Rabri Devi Bunglow Row: बिहार में 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के इस बयान के बाद कि वह किसी भी कीमत पर आवास खाली नहीं करेंगी और जरूरत पड़े तो सरकार फोर्स बुला ले वाला मामला अब सिर्फ सरकारी नोटिस तक सीमित नहीं रह गया है.
आवास खाली कराने को लेकर सरकार के पास क्या हैं विकल्प?
सरकारी नियमों के मुताबिक किसी भी सरकारी आवास का आवंटन समाप्त होने या नए आवंटन की स्थिति में उसे खाली कराना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया होती है. यदि तय समय के बाद भी आवास खाली नहीं किया जाता है तो संबंधित व्यक्ति को अनधिकृत कब्जा करने वाला माना जा सकता है. इसके बाद विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई शुरू होती है.
आमतौर पर पहले नोटिस जारी किया जाता है. इसके बाद जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर बेदखली और जुर्माने जैसी कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि 10 सर्कुलर रोड का मामला अब सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से कहीं आगे निकल चुका है, क्योंकि इसमें राज्य की दो प्रमुख पार्टी आमने-सामने है.
बेदखली कानून के तहत हो सकती है कार्रवाई
जानकारों के अनुसार यदि सरकार कानूनी रास्ता अपनाती है तो बिहार सरकारी परिसरों से जुड़े नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है. सबसे पहले संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस दिया जाता है और पूछा जाता है कि उन्हें आवास से बेदखल क्यों न किया जाए. यदि जवाब संतोषजनक नहीं होता है तो सक्षम प्राधिकारी जिला प्रशासन की मदद से आवास खाली कराने का आदेश जारी कर सकता है. इसके अलावा तय समय के बाद सरकारी आवास में रहने की अवधि के लिए जुर्माना भी लगाया जा सकता है. यह राशि बाजार दर के आधार पर तय की जा सकती है.
सरकार के सामने क्या चुनौती
कानूनी पहलू के साथ-साथ इस मामले का राजनीतिक पक्ष भी काफी अहम माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार को हर कदम बहुत सोच-समझकर उठाना होगा. अगर सरकार तुरंत सख्त कार्रवाई करती है तो विपक्ष इसे राजनीतिक प्रताड़ना का मुद्दा बना सकता है. ऐसी स्थिति में राबड़ी देवी को सहानुभूति मिलने की संभावना भी जताई जा रही है. दूसरी ओर यदि सरकार लंबे समय तक कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो विपक्ष इसे सरकार की कमजोरी बताने की कोशिश कर सकता है. ऐसे में सरकार के लिए संतुलन बनाना आसान नहीं होगा.
बातचीत का रास्ता भी खुला
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार चाहे तो बातचीत के जरिए भी समाधान निकालने की कोशिश कर सकती है. किसी वैकल्पिक व्यवस्था या आपसी सहमति के आधार पर विवाद को खत्म करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है. अब तक दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम नजर आ रहे हैं.
कोर्ट तक पहुंच सकता है मामला
माना जा रहा है कि यदि विवाद और बढ़ता है तो मामला अदालत तक भी पहुंच सकता है. आरजेडी इस मुद्दे पर कानूनी राहत लेने की कोशिश कर सकती है. यदि अदालत से किसी तरह की राहत मिलती है तो राबड़ी देवी को कुछ समय की मोहलत मिल सकती है. अगर अदालत से राहत नहीं मिलती है तो सरकार को कानून के तहत आगे की कार्रवाई करने का रास्ता साफ हो जाएगा.
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आने वाले दिनों पर टिकी निगाहें
10 सर्कुलर रोड आवास को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है. एक तरफ राबड़ी देवी अपने रुख पर अड़ी हुई हैं, तो दूसरी तरफ सरकार के सामने कानून और राजनीति दोनों का संतुलन बनाए रखने की चुनौती है.
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