Patna News (अजीत कुमार की रिपोर्ट): पटना के संपतचक स्थित वर्षों पहले नक्सल प्रभावित माने जाने वाले बैरिया इलाके में प्रेमलोक मिशन स्कूल की स्थापना कर शिक्षा की अलख जगाने वाले शिक्षाविद एवं प्रख्यात पर्यावरणविद् गुरुदेव श्री प्रेम ने देश में बढ़ते वायु प्रदूषण, घटती हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की बदहाल स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को विस्तृत पत्र भेजकर ठोस और सख्त कदम उठाने की मांग की है.
वायू प्रदुषण को लेकर जताई चिंता
गुरुदेव श्री प्रेम ने प्रधानमंत्री को भेजे अपने पत्र में कहा है कि देश की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है और इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि बिहार सहित देशभर में पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर कई विभाग काम कर रहे हैं, लेकिन आखिर किस स्तर पर चूक हो रही है इसकी गंभीर जांच होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि जब हर वर्ष पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, तब भी हरियाली कम क्यों हो रही है और प्रदूषण लगातार क्यों बढ़ रहा है.
उन्होंने कहा कि बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मिट्टी संरक्षण केंद्र तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई विभागों के अधिकारी इस महत्वपूर्ण विषय पर लचीला रवैया अपनाते हैं, जिसके कारण योजनाओं का लाभ धरातल पर नहीं दिखता. उन्होंने मांग की कि ऐसे अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि पूरे देश में एक सख्त संदेश जाए कि हरियाली और पर्यावरण संरक्षण में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
पौधों के संरक्षण की जवाबदेही हो तय
गुरुदेव श्री प्रेम ने अपने पत्र में बड़े पैमाने पर पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखकर बड़ा करना भी जरूरी है. अक्सर देखा जाता है कि पौधारोपण के बाद पौधे सूख जाते हैं और उनकी समुचित देखरेख नहीं हो पाती. ऐसे में पौधारोपण अभियान केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाता है.
उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय से आग्रह किया कि सड़कों की नियमित सफाई, धूल और मिट्टी के प्रदूषण पर नियंत्रण, सड़क किनारे गड्ढों को भरने, निर्माण कार्यों से फैलने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने और बड़े पैमाने पर हरियाली बढ़ाने के लिए प्रभावी एवं कठोर कदम उठाए जाएं. साथ ही जिन इलाकों में पौधे लगाए जाएं वहां उनकी निगरानी और संरक्षण की जिम्मेदारी तय की जाए ताकि लगाए गए पौधे वास्तव में पेड़ बनकर हरियाली का रूप धारण कर सकें.
केंद्र सरकार द्वारा चलाया जा रहा प्रोग्राम
गुरुदेव श्री प्रेम ने कहा कि देशभर में बढ़ रहे वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ चलाया जा रहा है. इसके तहत देश के ऐसे 130 शहरों की पहचान की गई है जहां लगातार पांच वर्षों से वायु गुणवत्ता निर्धारित मानकों से खराब पाई गई है. इस योजना में धूल, मिट्टी, घरेलू ईंधन, कचरा जलाने, निर्माण गतिविधियों तथा उद्योगों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय शामिल हैं.
उन्होंने बताया कि नगर निगम, यातायात विभाग और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित विभिन्न एजेंसियों द्वारा सड़क सफाई, वाटर स्प्रिंकलर के उपयोग और प्रदूषण नियंत्रण की कार्रवाई की जा रही है, लेकिन अभी भी जमीनी स्तर पर और गंभीर प्रयास की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और लापरवाही करने वालों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक पर्यावरण संरक्षण की योजनाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा.
केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं
गुरुदेव श्री प्रेम ने कहा कि भारत को हरित भारत, स्वस्थ भारत और स्वच्छ हवा वाला देश बनाने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर ईमानदारी से कार्य करना होगा. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल एक मुद्दा नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है.
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें जवाब प्राप्त हुआ है, जिसमें कहा गया है कि उनकी बातों और सुझावों को संबंधित विभागों को आगे आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है तथा इस दिशा में कई योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है. साथ ही उनकी बातों को प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का भी आश्वासन दिया गया है. गुरुदेव श्री प्रेम ने उम्मीद जताई कि यदि पौधारोपण के साथ पौधों की नियमित निगरानी, संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को सख्ती से लागू किया जाए तो आने वाले वर्षों में देश में हरियाली बढ़ेगी और लोगों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण मिल सकेगा.
