Patna News: पटना जिले के पालीगंज व्यवहार न्यायालय के नए भवन में न्यायिक कार्यों के सुचारु संचालन को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इस संबंध में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. इस नए आदेश के तहत पालीगंज अनुमंडल के विभिन्न थानों से संबंधित पुलिस मामलों के संज्ञान एवं सुनवाई के लिए न्यायिक अधिकारियों के बीच थानों का पुनर्वितरण किया गया है.
एसीजेएम को मिली बड़ी जिम्मेदारी
पटना के इस नए आदेश के अनुसार, सिविल जज (सीनियर डिवीजन)-I-सह-एसीजेएम-1 रवि पांडे को बिक्रम, पालीगंज, खिरीमोड़, पिपरपुरा टॉप तथा इमामगंज टॉप थानों से संबंधित मामलों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. अब इन पांचों थाना क्षेत्रों से जुड़े सभी नए और लंबित मामलों की सुनवाई सीधे एसीजेएम-1 की अदालत में की जाएगी.
इन थानों का बदला जिम्मा
पटना के इसी प्रशासनिक आदेश के तहत, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (कोर्ट संख्या-1) नदीम अहमद को भी नई जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें दुल्हिन बाजार, रानी तालाब एवं सिगोरी थाना क्षेत्र के मामलों का पूरा दायित्व सौंपा गया है. इन क्षेत्रों के मुकदमों की सुनवाई अब उनके न्यायालय में नियमित रूप से संचालित होगी.
दानापुर कोर्ट को सख्त निर्देश
पटना जिला जज के आदेश में दानापुर व्यवहार न्यायालय को एक बेहद सख्त निर्देश जारी किया गया है. इसके तहत दानापुर कोर्ट को निर्देशित किया गया है कि इन संबंधित थानों के जितने भी लंबित एफआईआर, चार्जशीट एवं अन्य न्यायिक अभिलेख हैं, उन्हें 15 दिनों के भीतर नव आवंटित न्यायालयों को हस्तांतरित किया जाए.
दुरुस्त होंगे सभी रजिस्टर
पटना के दानापुर न्यायालय से सभी मुकदमों की फाइलों के साथ-साथ आवश्यक रजिस्टर एवं अभिलेख भी संबंधित न्यायिक अधिकारियों को जल्द उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. इस प्रक्रिया को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए दोनों न्यायालयों के प्रशासनिक कर्मियों को आपसी समन्वय बनाकर काम करने को कहा गया है.
मामलों के निष्पादन में तेजी
पटना के न्यायिक प्रशासन का दृढ़ मानना है कि नए भव्य भवन में कार्य शुरू होने के साथ ही इस नई व्यवस्था से मुकदमों के निष्पादन में काफी तेजी आएगी. इससे न केवल वकीलों और वादियों को सहूलियत होगी, बल्कि न्यायिक कार्यों के दैनिक संचालन में भी अधिक सुगमता आएगी.
तत्काल प्रभाव से आदेश लागू
पटना जिले के पालीगंज अनुमंडल में आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से किया गया यह प्रशासनिक बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है. कोर्ट परिसर में मुकदमों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस व्यवस्था को 14 जुलाई 2026 से तत्काल प्रभाव से पूरे अनुमंडल क्षेत्र में लागू कर दिया गया है.
