NEET UG 2026 Re-Exam: देशभर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और सात स्तरीय निगरानी के बीच रविवार को आयोजित नीट यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा के दौरान लखीसराय जिले में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है. प्रशासन ने जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी कर नौ फर्जी परीक्षार्थियों (स्कॉलर/सॉल्वर) को गिरफ्तार किया है, जबकि बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़ी निजी एजेंसी के सात कर्मियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. प्रारंभिक जांच में ये संकेत मिले हैं कि गिरफ्तार लोग असली अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचे थे और इसके लिए मोटी रकम का सौदा किया गया था.
पीएमसीएच, एएनएमएमसीएच व अन्य मेडिकल कॉलेज के छात्र स्कॉलर के रूप में पकड़े गये
एसडीओ प्रभाकर कुमार ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार कई युवक खुद को मेडिकल कॉलेजों से जुड़ा बता रहे हैं. सूत्रों के अनुसार इनमें कुछ छात्र पीएमसीएच, एएनएमएमसीएच गया और दिल्ली के मेडिकल संस्थानों के हैं. जांच एजेंसियां इनके शैक्षणिक रिकॉर्ड और पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन कर रही हैं.
अधिकारियों के अनुसार एक मामले में हसनपुर परीक्षा केंद्र पर संजीत कुमार नामक अभ्यर्थी की जगह दूसरा व्यक्ति परीक्षा देते हुए पकड़ा गया. इससे संकेत मिलते हैं कि संगठित तरीके से अभ्यर्थियों की जगह स्कॉलरों को बैठाने का प्रयास किया गया था. वहीं, एएनएमएमसीएच, गया में एमबीबीएस फोर्थ इयर का छात्र अर्पित राज को भी लखीसराय से गिरफ्तार किया गया है. इससे पूछताछ जारी है.
तीन परीक्षा केंद्रों से पकड़े गये नौ सॉल्वर
जिले में चार परीक्षा केंद्रों- केंद्रीय विद्यालय किऊल, राजकीय हाइस्कूल हसनपुर, केआरके हाइस्कूल और डायट लखीसराय पर नीट यूजी पुनर्परीक्षा आयोजित की गयी थी. प्रशासन की सघन जांच के दौरान केंद्रीय विद्यालय से सात, हसनपुर हाइस्कूल से एक और केआरके हाइस्कूल से एक फर्जी परीक्षार्थी को गिरफ्तार किया गया.
दस्तावेजों और पहचान सत्यापन के दौरान फोटो व फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं होने पर अधिकारियों को संदेह हुआ, जिसके बाद कार्रवाई की गयी. एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि गिरफ्तार सभी लोग दूसरे अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा दे रहे थे. इनके खिलाफ साक्ष्य जुटाये जा रहे हैं और इनके नेटवर्क की भी जांच की जा रही है.
बायोमेट्रिक एजेंसी की भूमिका संदेह के घेरे में
मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने वाली निजी एजेंसी के सात कर्मियों को भी हिरासत में लिया गया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार कुछ फर्जी अभ्यर्थियों को बिना पूर्ण बायोमेट्रिक सत्यापन के ही परीक्षा केंद्रों में प्रवेश मिल गया था. इससे एजेंसी कर्मियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है. पुलिस इन कर्मियों से गुप्त स्थान पर पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं यह पूरा मामला सुनियोजित साजिश का हिस्सा तो नहीं था.
अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग की तलाश
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसके पीछे कोई संगठित अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग सक्रिय हो सकता है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि असली अभ्यर्थियों और स्कॉलरों के बीच कितना आर्थिक लेन-देन हुआ था और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं. गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है. प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सभी आरोपितों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जायेगी.
डीएम-एसपी ने संभाली कमान
घटना की सूचना मिलते ही डीएम शैलेंद्र कुमार, एसपी प्रेरणा कुमार, एसडीओ प्रभाकर कुमार और एसडीपीओ शिवम कुमार स्वयं परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे. अधिकारियों ने कई घंटे तक पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. प्रशासन ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर जांच शुरू कर दी है.
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परीक्षा में शामिल हुए थे 20 लाख परीक्षार्थी
रविवार को देशभर में लगभग 22.79 लाख अभ्यर्थियों के लिए आयोजित नीट यूजी पुनर्परीक्षा दोपहर दो बजे से शाम 5:15 बजे तक चली. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के अनुसार करीब 20 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया. इस बार परीक्षा की अवधि 180 मिनट से बढ़ा कर 195 मिनट कर दी गयी थी. हालांकि पूरे देश में परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बीच लखीसराय से सामने आया यह मामला सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
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