Lalu Yadav: लालू यादव का सम्मान नहीं करते महागठबंधन के नेता, जदयू नेता बोले- जंगलराज के दौर में वापस नहीं जायेगा बिहार

Lalu Yadav: इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर रविवार को महागठबंधन के घटक दलों की एक और बैठक हो रही है. इस बैठक में घटक दलों में बेहतर समन्वय और चुनावी रणनीति पर चर्चा हो रही है. पटना के दीघा आशियाना रोड के एक रिसॉर्ट में होने वाली बैठक से पहले जदयू ने जोरदार तंज कसा है.

Lalu Yadav: जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि महागठबंधन की बैठक उनका आंतरिक मामला है, लेकिन दीघा के जिस रिसॉर्ट में यह बैठक हो रही है, उस इलाके में लोग लालू यादव के शासनकाल में दिन में भी नहीं जाते थे. उन्होंने बैठक में शामिल होने वाले लोगों से मरीन ड्राइव भी देखने की बात कही. नीरज कुमार ने महागठबंधन के नेताओं को सलाह देते हुए कहा कि इससे बेहतर होता कि राज्य सरकार जो पानी का जहाज चलाती है, उसमें बैठक करते और खुशनुमा माहौल मिलता.

लालू यादव लगा रहे गुहार

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा कि लालू यादव अपने बेटे को महागठबंधन का नेता बनाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन इस गठबंधन के नेता इतने निष्ठुर हो गए हैं कि उनकी भावना का भी सम्मान नहीं कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा, “महागठबंधन की बैठक का सीधा मतलब है कि ‘लेना न देना, तेजस्वी यादव के लिए केवल फुलेना’ साबित हो रहा है.”

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सभी दल के नेता होंगे शामिल

राजद नेता तेजस्वी यादव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में महागठबंधन के सभी छह घटक दलों के नेता शामिल होंगे. महागठबंधन की यह तीसरी बैठक है. इससे पहले महागठबंधन की पहली बैठक बीते 17 अप्रैल को पटना स्थित राजद कार्यालय में हुई थी. उसके बाद प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में 24 अप्रैल को दूसरी बैठक हुई, जिसमें चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई थी. महागठबंधन की तरफ से हालांकि अब तक मुख्यमंत्री के उम्मीदवार को लेकर किसी नाम की घोषणा नहीं हुई है.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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