धुरंधर-2 पर बिहार के मंत्री बड़ा बयान, बोले- फिल्म में अतीक को दिखाकर बिल्कुल ठीक किया

Dhurandhar-2: धुरंधर-2 फिल्म इन दिनों एक खास किरदार को लेकर चर्चा में है. इसे अतीक अहमद से प्रेरित बताया जा रहा है. इस पर बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव का बयान सामने आया है. उन्होंने फिल्म का समर्थन करते हुए कहा कि समाज की सच्चाई दिखाना गलत नहीं है.

Dhurandhar-2: धुरंधर-2 इन दिनों खूब चर्चा में है. आदित्य धर और रणवीर सिंह की इस फिल्म को दर्शकों का गजब रिस्पॉन्स मिल रहा है. 5 दिसंबर 2025 को जब इसका पहला पार्ट रिलीज हुआ था तभी से दूसरे पार्ट का इंतजार हो रहा था. फिल्म की सबसे ज्यादा चर्चा एक खास किरदार को लेकर हो रही है, जो यूपी के चर्चित गैंगस्टर अतीक अहमद से प्रेरित बताया जा रहा है. इसी मुद्दे पर अब राम कृपाल यादव का बयान सामने आया है.

क्या बोले राम कृपाल यादव

राम कृपाल यादव ने कहा कि फिल्मों का काम समाज की सच्चाई को दिखाना होता है. उन्होंने बताया कि अतीक अहमद सांसद रह चुके थे और वह उन्हें करीब से जानते थे. उनके मुताबिक, फिल्म में इस तरह का किरदार दिखाना गलत नहीं है, बल्कि सही है. उन्होंने फिल्म के डायरेक्टर और पूरी टीम को शुभकामनाएं भी दीं.

फिल्म में आतिफ अहमद नाम का किरदार दिखाया गया है, जिसे अतीक अहमद से प्रेरित माना जा रहा है. एक सीन में यह किरदार टीवी पर नोटबंदी की खबर देखते हुए बातचीत करता नजर आता है. वहीं फिल्म में उसके आखिरी पलों से जुड़ा एक सीन भी दिखाया गया है, जिसमें वह अपने बेटे के जनाजे में न जा पाने की बात करता है और अचानक गोलियां चलने लगती हैं.

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यूजर्स नोटबंदी के फैसले को सही ठहरा रहे

इस किरदार को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. कुछ लोग कह रहे हैं कि किसी के गुजर जाने के बाद उसके बारे में इस तरह दिखाना सही नहीं है. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि फिल्म में दिखाए गए कई पहलू पहले सामने क्यों नहीं आए.

दूसरी तरफ, कुछ यूजर्स नोटबंदी के फैसले को सही ठहरा रहे हैं और कह रहे हैं कि देश की सुरक्षा के लिए ऐसे कदम जरूरी थे. कुल मिलाकर फिल्म का यह किरदार लोगों के बीच चर्चा का बड़ा कारण बन गया है और इसी वजह से फिल्म को लेकर दिलचस्पी भी बढ़ती जा रही है.

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Published by: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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