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सिटीजन इंटरफेस सिस्टम से आसान होंगी 37 विभागों से नागरिक सेवाएं

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
बिहार
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फाइल

राजदेव पांडेय, पटना. राज्य के सरकारी विभागों की विभिन्न नागरिक सेवाओं को लेने में नागरिकों के सामने आने वाली समस्याएं पहचानी जा रही हैं.

यह जटिलता हर हाल हाल में 31 मार्च तक चिह्नित की जानी है. इन जटिलताओं को खत्म करने के लिए प्रदेश में बिजनेस रेग्यूलेटरी कम्पलाइंस बर्डन सिटीजन इंटरफेस सिस्टम प्रभावी किया जा रहा है. यह सिस्टम इसी साल अगस्त के बाद किसी भी समय प्रभावी हो जायेगा.

प्रस्तावित सिस्टम को कुछ इस तरह समझें कि अगर किसी नागरिक ने मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत आवेदन किया है, तो आवेदन से लेकर लोन जारी होने तक की प्रोसेस में सरकारी अफसरों या कर्मचारियों से पांच बार आमना-सामना होता है.

सिटीजन इंटरफेस सिस्टम प्रभावी हो जाने से उनका सरकारी कर्मचारी या अधिकारी से अधिकतम केवल दो बार ही सामना होगा. शेष काम ऑनलाइन ही होगा. इसी तरह अगर आपदा में फसल क्षतिग्रस्त होती है ,तो उसे पटवारी और दूसरे रेवेन्यू अफसरों का सामना करना पड़ता है.

बदलने जा रहे सिस्टम में वह खुद ही अपना नुकसान ऑनलाइन भरेंगे. राजस्व विभाग उनका सत्यापन भी सेटेलाइट या किसी अन्य प्रक्रिया से सत्यापित कर देगा. इस तरह नागरिकों को आसान प्रक्रिया से बिना किसी बाबूगिरी या अफसर शाही के शिकार हुए सरकारी सेवा मिल सकेगी.

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस प्रक्रिया का मकसद यह है कि बिना अफसर एवं कर्मचारियों से मिले आम नागरिकों को घर बैठे आसानी से सरकारी सुविधा या सेवा उपलब्ध हो जाये. इस नये सिस्टम के तहत प्रदेश के वित्त, पंचायत एवं कार्मिक विभाग को छोड़कर शेष सभी 37 विभागों से कहा गया है कि वह अपने- अपने विभागों की सेवाओं को देने में आने वाली जटिलताओं को चिह्नित करने के लिए कहा है.

बाद में चिह्नित जटिलताओं को रेग्यूलेटरी कम्पलाइंस पोर्टल पर 31 मार्च तक अपलोड करना होगा. वहीं, वैधानिक जटिलाओं को चिह्नित कर अपलोड करने के लिए अंतिम तिथि 15 अगस्त तय की गयी है.

उद्योग विभाग के अपर सचिव ने इस संबंध में सभी 37 विभागों के प्रधान सचिवों को लिखा है कि वह इस संबंध में जरूरी औपचारिकताएं पूरी करें, ताकि इस सिस्टम को समय- सीमा में आमूल बदलाव के बाद प्रभावी तौर पर लागू किया जा सके.उद्योग विभाग को इस सिस्टम को प्रभावी बनाने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है.

Posted by Ashish Jha

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