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Chaitra Navratri 2023 : घट स्थापना के साथ आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत, नाव पर आ रही हैं मां दुर्गा

चैत्र शुक्ल सप्तमी 28 मार्च मंगलवार को मृगशिरा नक्षत्र व शोभन योग में माता का पट खुलेगा. चैत्र शुक्ल अष्टमी बुधवार 29 मार्च को महाअष्टमी का व्रत और 30 मार्च को महानवमी में पाठ का समापन, हवन व कन्या पूजन होंगे. विजयादशमी को देवी की विदाई कर जयंती धारण किया जायेगा.

पटना. हिंदू धर्मावलंबियों के पवित्र चैत्र मास के शुक्ल प्रतिपदा में विक्रम संवत 2080 व घट स्थापना के साथ वासंतिक चैत्र नवरात्र बुधवार से शुरू हो रहा है. आज उत्तरभाद्रपद नक्षत्र व शुक्ल योग में कलश स्थापना किया जायेगा. इस चैत्र नवरात्र के दौरान ग्रह-गोचरों का कई बार पुण्यकारी संयोग बनेगा, जो श्रद्धालुओं के लिए उत्तम फलदायी रहेगा. बुधवार को देवी माता के प्रथम स्वरूप में मां शैलपुत्री की पूजा होगी. घर व मंदिरों में विशेष पूजा व वेद मंत्रों की गूंज, घंटी, शंख, आरती, स्तुति आदि की ध्वनि सुनाई देगी. माता के उपासक दुर्गा सप्तशती, रामचतिरमानस, सुंदरकांड, देवी महापुराण आदि का पाठ आरंभ करेंगे.

आचार्य राकेश झा ने कहा कि चैत्र शुक्ल सप्तमी 28 मार्च मंगलवार को मृगशिरा नक्षत्र व शोभन योग में माता का पट खुलेगा. चैत्र शुक्ल अष्टमी बुधवार 29 मार्च को महाअष्टमी का व्रत और 30 मार्च को महानवमी में पाठ का समापन, हवन व कन्या पूजन होंगे. विजयादशमी को देवी की विदाई कर जयंती धारण किया जायेगा.

नाव पर आ रही हैं मां दुर्गा

चैत्र नवरात्र में प्रथम दिन बुधवार होने से देवी दुर्गा का आगमन नौका यानी नाव पर हो रहा है. भगवती माता के इस आगमन से श्रद्धालुओं को सर्व सिद्धि की प्राप्ति होगी. उनकी मनोकामना जल्द पूर्ण होंगी. चैत्र शुक्ल दशमी 31 मार्च शुक्रवार को देवी की विदाई गज यानी हाथी पर होगी.

राशि के अनुसार करें मां की आराधना

  • मेष : रक्त चंदन, लाल पुष्प और सफेद मिष्ठान्न अर्पण करें

  • वृष : पंचमेवा, सुपाड़ी, सफेद चंदन, पुष्प चढ़ाएं

  • मिथुन : केला, पुष्प, धूप से पूजा करें

  • कर्क : बताशा, चावल, दही का अर्पण करें

  • सिंह : तांबे के पात्र में रोली, चंदन, केसर, कर्पूर के साथ आरती करें

  • कन्या : फल, पान पत्ता, गंगाजल मां को अर्पित करें

  • तुला : दूध, चावल, चुनरी चढ़ाएं और घी के दीपक से आरती करें

  • वृश्चिक : लाल फूल, गुड़, चावल और चंदन के साथ पूजा करें

  • धनु : हल्दी, केसर, तिल का तेल, पीत पुष्प अर्पित करें

  • मकर : सरसों तेल का दीया, पुष्प, चावल, कुमकुम और हलवा मां को अर्पण करें

  • कुंभ : पुष्प, कुमकुम, तेल का दीपक और फल अर्पित करें

  • मीन : हल्दी, चावल, पीले फूल और केले के साथ पूजन करें

Also Read: 22 मार्च को नववर्ष व विक्रम संवत 2080 का होगा आरंभ, नये साल में कुल छह ग्रहण, तीन सूर्य तो तीन चंद्र ग्रहण

कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त :

  • उदयकालिक योग : प्रातः 05:59 बजे से पूरे दिन

  • लाभ-अमृत मुहूर्त : प्रातः 05:59 बजे से सुबह 08:55 बजे तक

  • शुभ योग मुहूर्त : सुबह 10 :26 बजे से 11 :57 बजे तक

  • अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:32 बजे से 12:21 बजे तक

Prabhat Khabar Digital Desk
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