पटना से अनुराग प्रधान की रिपोर्ट
BPSC TRE- 4 Notification Update: बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती को संतुलित करने और रिक्त पदों को भरने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम उठाया है. विधानसभा के मानसून सत्र में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में 63,047 शिक्षक सरप्लस हैं, जिनका फेज वाइज समायोजन उन स्कूलों में किया जा रहा है जहां शिक्षकों की कमी है.
इस आधार पर होगी शिक्षकों की नियुक्ति
साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अब शिक्षकों की नियुक्ति जिला कैडर के आधार पर होगी. शिक्षा मंत्री ने सदन में जानकारी दी कि टीआरई-4 शिक्षक भर्ती की अधियाचना इसी महीने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को भेज दी जायेगी. मुख्यमंत्री की ओर से अगले 5 सालों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति के निर्णय के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है.
63,047 सरप्लस शिक्षकों का होगा समायोजन
शिक्षा विभाग के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में निर्धारित मानक से अधिक 63,047 शिक्षक कार्यरत हैं. दूसरी ओर कई विद्यालय ऐसे हैं जहां शिक्षकों की कमी बनी हुई है. इस असंतुलन को दूर करने के लिए सरप्लस शिक्षकों का जरूरत वाले विद्यालयों में समायोजन किया जा रहा है, ताकि सभी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके.
अब लागू होगी जिला कैडर व्यवस्था
शिक्षा मंत्री ने सदन में बताया कि शिक्षकों को अब जिला कैडर के तहत नियुक्त किया जायेगा. इसका अर्थ यह होगा कि जिस जिले में शिक्षक की नियुक्ति होगी, सामान्य परिस्थितियों में उसी जिले में उन्हें सेवा देनी होगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य हर एक जिले में शिक्षकों की उपलब्धता को स्थिर बनाए रखना और बार-बार होने वाले स्थानांतरण से उत्पन्न समस्याओं को कम करना है.
टीआरई-4 में देरी का कारण भी बताया
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि टीआरई-4 की अधियाचना भेजने में हुई देरी जानबूझकर नहीं, बल्कि रिक्तियों का वास्तविक आकलन करने के कारण हुई. सभी जिलों से विषयवार और विद्यालयवार शिक्षकों की कमी का विस्तृत विवरण मंगाया गया, जिसके आधार पर अंतिम रिक्तियां तैयार की गईं हैं. अब अधियाचना भेजने की प्रक्रिया अंतिम फेज में है.
सरकार का दावा
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का कहना है कि सरप्लस शिक्षकों के समायोजन, जिला कैडर व्यवस्था और टीआरई-4 भर्ती के पूरा होने के बाद राज्य के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर हो जायेगी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी.
