Bihar News: बिहार सरकार ने राज्य के अराजकीय प्रस्वीकृत अनुदानित मदरसों की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है. शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की घोषणा के बाद शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी जिलों के डीएम को आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए हैं. सरकार का कहना है कि जिन संस्थानों को सरकारी अनुदान मिल रहा है, वहां शिक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा.
हर प्रखंड में बनेगी तीन सदस्यीय जांच समिति
शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल द्वारा जारी निर्देश के अनुसार प्रत्येक प्रखंड स्तर पर तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया जाएगा. समिति की अध्यक्षता संबंधित प्रखंड के बीडीओ या सीओ करेंगे. वहीं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सदस्य सचिव होंगे और संबंधित मुख्यालय स्थित सरकारी माध्यमिक या उच्च माध्यमिक विद्यालय के वरीयतम प्रधानाध्यापक को सदस्य बनाया जाएगा.
डीईओ करेंगे सदस्यों का नामांकन
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि समिति के सदस्यों को नामित करने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) की होगी. समिति के गठन के बाद 10 दिनों के भीतर संबंधित मदरसे का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करनी होगी. रिपोर्ट के साथ फोटो और अन्य आवश्यक साक्ष्य भी संलग्न कर मुख्यालय को भेजने होंगे.
अनुदान पाने वाले मदरसों की होगी पड़ताल
विभाग का कहना है कि राज्य सरकार इन मदरसों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है. शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन भी सरकारी अनुदान से दिया जाता है. ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और संस्थान निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित हो रहे हों.
फर्जी मदरसों और संस्कृत विद्यालयों पर होगी कार्रवाई
पिछले सप्ताह शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट कहा था कि राज्य में चल रहे सभी मदरसों और संस्कृत विद्यालयों की जांच कराई जाएगी. जांच में यदि कोई संस्थान नियमों के विरुद्ध संचालित होता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उसे बंद भी किया जाएगा.
‘शिक्षा के नाम पर फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं’
मिथिलेश तिवारी ने कहा था कि बिहार में शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा स्वीकार नहीं किया जाएगा. बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले संस्थानों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि सरकार उन संस्थानों को प्रोत्साहन देगी जो पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं.
शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में मदरसों के साथ-साथ संस्कृत विद्यालयों के विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाएगा. सरकार दोनों प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा.
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